नींद क्या मीठी है आ इस का मज़ा ले सो जा
By mohammad-husain-azadJanuary 4, 2024
नींद क्या मीठी है आ इस का मज़ा ले सो जा
ख़्वाब-ए-राहत का ज़रा लुत्फ़ उठा ले सो जा
सो जा सो जा ओ मिरे नाज़ों के पाले सो जा
रात-दिन झूले में ऐ झूलने वाले सो जा
ऐ मिरे चाँद मिरे घर के उजाले सो जा
भोले-भाले मिरे प्यारे मिरे बाले सो जा
कभी बेकार नहीं जाता है इस्लाम का वक़्त
होता हर वक़्त का इक काम है हर काम का वक़्त
खेलने के लिए है सुब्ह का या शाम का वक़्त
काम के वास्ते दिन रात है आराम का वक़्त
ऐ मिरे चाँद मिरे घर के उजाले सो जा
भोले-भाले मिरे प्यारे मिरे बाले सो जा
ख़्वाब-ए-राहत का ज़रा लुत्फ़ उठा ले सो जा
सो जा सो जा ओ मिरे नाज़ों के पाले सो जा
रात-दिन झूले में ऐ झूलने वाले सो जा
ऐ मिरे चाँद मिरे घर के उजाले सो जा
भोले-भाले मिरे प्यारे मिरे बाले सो जा
कभी बेकार नहीं जाता है इस्लाम का वक़्त
होता हर वक़्त का इक काम है हर काम का वक़्त
खेलने के लिए है सुब्ह का या शाम का वक़्त
काम के वास्ते दिन रात है आराम का वक़्त
ऐ मिरे चाँद मिरे घर के उजाले सो जा
भोले-भाले मिरे प्यारे मिरे बाले सो जा
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