आवाज़ दिल की

By prem-pal-ashkJanuary 4, 2024
हम उख़ुव्वत के पुजारी हम मोहब्बत के ग़ुलाम
दोस्ती का कुछ हमीं से है जहाँ-भर में भरम
मज़हर-ए-हक़ हैं हमारे वास्ते दैर-ओ-हरम
हम अहिंसा के हैं रसिया आश्ती के हम इमाम


इंकिसारी अपना मस्लक 'आजिज़ी अपना शि'आर
दोस्तों से दोस्ती कर के दिखा देते हैं हम
दोस्ती के नाम पर ख़ुद को मिटा देते हैं हम
हर तकल्लुफ़ और तसन्नो' से हमें होता है 'आर


ना-तवानों के हैं रक्षक हक़-परस्तों के हैं दास
ज़ुल्म-ओ-इस्तिब्दाद को जड़ से मिटा देते हैं हम
दुश्मनों को दिन ही में तारे दिखा देते हैं हम
है नहीफ़ों और ज़’ईफ़ों को हमारे दम से आस


किब्र-ओ-नख़वत की कलाई मोड़ते आए हैं हम
बुग़्ज़-ओ-नफ़रत का निकलता है हमारे दम से दम
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