औरत
By prem-pal-ashkJanuary 4, 2024
'अक़्ल की बारीकियों से दूर है तेरा ख़याल
तू एलोरा का तसव्वुर तू अजंता का निखार
तेरे चरनों में है गंगा तू हिमाला का वक़ार
ताज से भी ख़ूबसूरत है तिरा हुस्न-ओ-जमाल
'अज़्म है प्रताप का तो तुझ में 'गौतम' का शु'ऊर
तेरी मिट्टी क्या है सोना तू सरापा नूर है
ज़िंदगी का हर तकल्लुफ़ तुझ से कोसों दूर है
फूल की पत्ती से दिल होता है तेरा चूर-चूर
दूध आँचल में है तेरे आँख तेरी नम भी है
तेरे दम से प्यार को हासिल है दुनिया में बक़ा
एक पल में फूँक दे तू ख़िर्मन-ए-मक्र-ओ-रिया
ये हक़ीक़त है कि तू शो'ला भी है शबनम भी है
तुझ से टक्कर लेने वाला आख़िरश पछताएगा
होगा चकना-चूर जो दीवार बन कर आएगा
तू एलोरा का तसव्वुर तू अजंता का निखार
तेरे चरनों में है गंगा तू हिमाला का वक़ार
ताज से भी ख़ूबसूरत है तिरा हुस्न-ओ-जमाल
'अज़्म है प्रताप का तो तुझ में 'गौतम' का शु'ऊर
तेरी मिट्टी क्या है सोना तू सरापा नूर है
ज़िंदगी का हर तकल्लुफ़ तुझ से कोसों दूर है
फूल की पत्ती से दिल होता है तेरा चूर-चूर
दूध आँचल में है तेरे आँख तेरी नम भी है
तेरे दम से प्यार को हासिल है दुनिया में बक़ा
एक पल में फूँक दे तू ख़िर्मन-ए-मक्र-ओ-रिया
ये हक़ीक़त है कि तू शो'ला भी है शबनम भी है
तुझ से टक्कर लेने वाला आख़िरश पछताएगा
होगा चकना-चूर जो दीवार बन कर आएगा
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