बसंत बहार

By ata-ur-rahman-tariqJanuary 19, 2024
पत्ते नए ख़ुशबू नई
रस रंग के जल्वे कई
संगीत सुर बोली मधुर
सूरज भला सोना ढला


तितली हँसी ग़ाज़ा मला
धानी सुनहरी चम्पई
पत्ते नए ख़ुशबू नई
चश्मा वहाँ बहने लगा


आ तू भी आ कहने लगा
सनकी हवा राहत-फ़ज़ा
दिन आ गए लहरा गए
संसार से उपहार से


बगिया हमारी सज गई
पत्ते नए ख़ुशबू नई
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