बोझ-ए-बदन
By hafeez-aatishJanuary 3, 2024
बदन मसरूफ़ियत से थक गया है
नज़र भी अब बहुत धुँदला गई है
चलो अब 'उम्र की सीढ़ी हटा लें
किसी सहरा की वीरानी पुकारें
बना कर कोई अच्छा सा बहाना
घने जंगल की तन्हाई में रक्खें
और अपने बोझ से आँखें बचा कर
वहाँ से तेज़ क़दमों भाग आएँ
नज़र भी अब बहुत धुँदला गई है
चलो अब 'उम्र की सीढ़ी हटा लें
किसी सहरा की वीरानी पुकारें
बना कर कोई अच्छा सा बहाना
घने जंगल की तन्हाई में रक्खें
और अपने बोझ से आँखें बचा कर
वहाँ से तेज़ क़दमों भाग आएँ
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