दोनों ख़ुश थे
By aazam-khursheedJanuary 18, 2024
उस ने
अनाज की बोरी का छेद
जहाँ से दाना दाना गिर रहा था और सफ़र
उस के नज़दीक बाक़ी था
जिस्म के तमाम कपड़े
छेद को बंद करने के लिए ठूँस दिए
मैं ने देखा ख़ुश था
ख़ुश वो भी था
जिस की झोली से गिरे अनाज पर परिंदे
रक़्स कर रहे थे
अनाज की बोरी का छेद
जहाँ से दाना दाना गिर रहा था और सफ़र
उस के नज़दीक बाक़ी था
जिस्म के तमाम कपड़े
छेद को बंद करने के लिए ठूँस दिए
मैं ने देखा ख़ुश था
ख़ुश वो भी था
जिस की झोली से गिरे अनाज पर परिंदे
रक़्स कर रहे थे
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