एक ख़्वाहिश

By hafeez-aatishJanuary 3, 2024
ज़र्द पत्ते
बरहना पेड़ों की डालें
तक रही हैं आसमाँ
ख़ुश्क धरती पर दराड़ें पड़ गईं


प्यास की शिद्दत कि उफ़
लम्बे साए की तरह
ऊँचे पहाड़ों पर खड़ी
मुंतज़िर है ज़िंदगी की


और मैं इस ख़ुश्क धरती पर
एड़ी रगड़ कर ज़ोर से
फिर किसी चश्मे का ख़्वाहिश-मंद हूँ
69126 viewsnazmHindi