हुस्न

By prem-pal-ashkJanuary 4, 2024
चल पड़ी अठखेलियाँ करती हुई बाद-ए-नसीम
इक कली ग़ुंचा बनी ग़ुंचा चटक कर गुल बना
ख़ुद-ब-ख़ुद करने लगा वो अपने ख़ालिक़ की सना
ज़र्रे ज़र्रे को जगाने आई गुलशन में शमीम


डाली डाली ख़ुद-ब-ख़ुद देती है मस्ती का पयाम
मुँह शगूफ़े का कोई चुपके से आ कर धो गया
पत्ता पत्ता ख़ुद-ब-ख़ुद ही खो के कुछ पाने लगा
बूटे-बूटे ने निहारा अपना हुस्न-ए-ना-तमाम


एक तितली कर रही है आ के सौसन से सवाल
आँख मूँदे सो रहा है आज नर्गिस का शु'ऊर
मोतिया चम्पा चँबेली अपनी दुनिया से हैं दूर
ऐ सखी मुझ को बता दे हुस्न का क्या है मआल


फूल की पत्ती पे देखा मैं ने शबनम का शबाब
ले उड़ा सुर्ख़ी सफ़ेदी सुब्ह-ए-नौ का आफ़्ताब
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