ईद

By nihal-tabanJanuary 4, 2024
पहली बार लगा जीवन में
कोई नहीं है दुख का साथी
इतने सारे लोग थे फिर भी
मैं ने ईद अकेले काटी


सोच रहा हूँ सामने तेरे
यादों की फुलवारी होगी
दूर किसी परदेस में तू ने
कैसे ईद गुज़ारी होगी


ग़ुर्बत के ऐसे आलम में
कौन दुपट्टा लाया होगा
इस अफ़रातफ़री में तू ने
सूट कहाँ से पाया होगा


चूड़ी बिंदी ईद के तोहफ़े
ले कर यादें आईं होंगी
अपने मन ही मन में तू ने
दूध सिवइयाँ खाई होंगी


पानी पीना खाना खाना
भूल गई होगी बातों में
दिन में इक उलझन सी होगी
नींद उड़ी होगी रातों में


कोई ख़बर न चिट्ठी-पाती
दिल में थी अफ़सोस उदासी
अब ऐसे आलम में 'ताबाँ'
क्या मुँह ले कर ईद मनाते


जाने वाले रूठ न जाते
पहली बार लगा जीवन में
कोई नहीं है दुख का साथी
मैं ने ईद अकेले काटी


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