मैं सीता हूँ
By shakeel-azmiJanuary 5, 2024
पती के साथ में
बनवास में रहना मुक़द्दर है मिरा
कोई रावन मिरी कुटिया में भक्षक बन के आए
धोका दे मुझ को
उठा ले जाए मुझ को मेरी दुनिया से
बिछड़ जाऊँ मैं अपनों से
बचा कर दुश्मनों से धर्म भी
मर्यादा भी
ज़िंदा रखूँ ख़ुद को
पराए देस में अपने पती का रास्ता देखूँ
कटे हर पल मिरा सदियों के जैसा
मिरे दुख को समझने की किसी को क्या ज़रूरत है
भले मैं राम की पत्नी हूँ लेकिन हूँ तो औरत ही
ये जो सम्मान है इस से मुझे नीचे उतारो
मुझे अग्नी परिक्षा से गुज़ारो
बनवास में रहना मुक़द्दर है मिरा
कोई रावन मिरी कुटिया में भक्षक बन के आए
धोका दे मुझ को
उठा ले जाए मुझ को मेरी दुनिया से
बिछड़ जाऊँ मैं अपनों से
बचा कर दुश्मनों से धर्म भी
मर्यादा भी
ज़िंदा रखूँ ख़ुद को
पराए देस में अपने पती का रास्ता देखूँ
कटे हर पल मिरा सदियों के जैसा
मिरे दुख को समझने की किसी को क्या ज़रूरत है
भले मैं राम की पत्नी हूँ लेकिन हूँ तो औरत ही
ये जो सम्मान है इस से मुझे नीचे उतारो
मुझे अग्नी परिक्षा से गुज़ारो
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