नाज़ाँ न हो दीवाने
By prem-pal-ashkJanuary 4, 2024
उड़ते हुए पंछी पर
बहते हुए दरिया पर
आज़ाद तख़य्युल पर
फूलों की महक पर भी
ग़ुंचों की चटक पर भी
कलियों के तबस्सुम पर
शबनम की तजल्ली पर
शो'ले की लपक पर भी
उड़ती हुई ख़ुशबू पर
हर हुस्न के धारे पर
मा'सूम इशारे पर
लहके हुए बादल पर
ख़ामोश फ़ज़ाओं पर
मदहोश हवाओं पर
ख़्वाबों के गुलिस्ताँ पर
नाज़ाँ न हो दीवाने
अपने हों कि बेगाने
बहते हुए दरिया पर
आज़ाद तख़य्युल पर
फूलों की महक पर भी
ग़ुंचों की चटक पर भी
कलियों के तबस्सुम पर
शबनम की तजल्ली पर
शो'ले की लपक पर भी
उड़ती हुई ख़ुशबू पर
हर हुस्न के धारे पर
मा'सूम इशारे पर
लहके हुए बादल पर
ख़ामोश फ़ज़ाओं पर
मदहोश हवाओं पर
ख़्वाबों के गुलिस्ताँ पर
नाज़ाँ न हो दीवाने
अपने हों कि बेगाने
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