परछाईं
By hafeez-aatishJanuary 3, 2024
रोज़ की तरह
पिछले पहर
घर के दरवाज़े पर दस्तकें
ज़ह्न पर ख़ौफ़ सा
चेहरे लिपटे हुए
गर्द में
ज़र्द आँखों की कश्कोल में
ले के अपने सवाल
कल की तरह ये फिर
आ न जाएँ कहीं
पिछले पहर
घर के दरवाज़े पर दस्तकें
ज़ह्न पर ख़ौफ़ सा
चेहरे लिपटे हुए
गर्द में
ज़र्द आँखों की कश्कोल में
ले के अपने सवाल
कल की तरह ये फिर
आ न जाएँ कहीं
12397 viewsnazm • Hindi