सामराज की शिकस्त
By bano-tahira-sayeedJanuary 2, 2024
मादर-ए-हिन्द के माथे की शिकन दूर हुई
चार सौ साल की ज़िल्लत का निशाँ
शुक्र है मग़रिबी ताक़त की ‘उफ़ूनत भरी साँस
टूट कर डूब गई ख़त्म हुआ अफ़्साना
अब गोवा में न कोई ग़ैर जमाएगा क़दम
हुर्रियत ‘अज़्मत-ओ-‘इज़्ज़त का मुक़द्दस परचम
ख़ुशनुमा साहिली मैदानों पे लहराएगा
जल-परी गाएगी आज़ादी का गीत
लहरें उठ उठ के सलामी देंगी
गुनगुनाएँगी हवाएँ कि गया दौर-ए-ख़िज़ाँ
मादर-ए-हिन्द के होंटों पे तबस्सुम होगा
और पेशानी पे सिंदूर का इक नुक़्ता-ए-सुर्ख़
उस सिपाही की हमें याद दिलाएगा सदा
ख़ून का जिस ने दिया बाग़-ए-वतन को तोहफ़ा
गरचे गुमनाम रहा दाद का तालिब न हुआ
आह गुमनाम सिपाही तिरी तुर्बत को सलाम
चार सौ साल की ज़िल्लत का निशाँ
शुक्र है मग़रिबी ताक़त की ‘उफ़ूनत भरी साँस
टूट कर डूब गई ख़त्म हुआ अफ़्साना
अब गोवा में न कोई ग़ैर जमाएगा क़दम
हुर्रियत ‘अज़्मत-ओ-‘इज़्ज़त का मुक़द्दस परचम
ख़ुशनुमा साहिली मैदानों पे लहराएगा
जल-परी गाएगी आज़ादी का गीत
लहरें उठ उठ के सलामी देंगी
गुनगुनाएँगी हवाएँ कि गया दौर-ए-ख़िज़ाँ
मादर-ए-हिन्द के होंटों पे तबस्सुम होगा
और पेशानी पे सिंदूर का इक नुक़्ता-ए-सुर्ख़
उस सिपाही की हमें याद दिलाएगा सदा
ख़ून का जिस ने दिया बाग़-ए-वतन को तोहफ़ा
गरचे गुमनाम रहा दाद का तालिब न हुआ
आह गुमनाम सिपाही तिरी तुर्बत को सलाम
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