तिलिस्म-एसदा

By hafeez-aatishJanuary 3, 2024
ये सोते सोते
मुझे क्या हुआ कि उठ बैठा
किसी की याद में तड़पा
न ख़्वाब से चौंका


न कोई आँधी
न तूफ़ाँ का शोर था बाहर
तमाम शहर था ख़ामोशियों में डूबा हुआ
बहुत अंधेरा था अंदर


सुझाई क्या देता
मैं जुस्तुजू को जलाए हुए निकल आया
और दूर तक
कई रस्तों पे जा के लौट आया


अब
अपने कमरे की दीवार को कुरेदता हूँ
कि आज शायद
यहीं से कोई सदा आए


और ये तिलिस्म-एसदा पिछले पहर का टूटे
60056 viewsnazmHindi