आश्रा शायरी
आश्रा पर दिलचस्प शायरी
आश्रा पर समर्पित एक सुंदर शायरी संग्रह का खोज करें। इन शब्दों को आपकी भावनाओं के साथ उलझने दें और कविता के माध्यम से अपने जज्बातों को व्यक्त करें।
वो सब में नेमतें तक़्सीम कर के ख़ुश रहता
मगर ख़ुदाई का दा'वा नहीं किया उस ने
वो माँ का हाथ बटाता था घर के कामों में
प फ़ैमिनस्टी का चर्चा नहीं किया उस ने
जो क़र्ज़ फ़र्ज़ नहीं थे अदा किए वो भी
किसी से कोई तक़ाज़ा नहीं किया उस ने
बनाई ज़िंदगी जिन की वो उस की मौत बने
ये दुख मुझे है कि अच्छा नहीं किया उस ने
फिर एक अस्र वो मस्जिद की सीढ़ियों पे ढला
तो बुझते दिल से भी शिकवा नहीं किया उस ने
मगर ख़ुदाई का दा'वा नहीं किया उस ने
वो माँ का हाथ बटाता था घर के कामों में
प फ़ैमिनस्टी का चर्चा नहीं किया उस ने
जो क़र्ज़ फ़र्ज़ नहीं थे अदा किए वो भी
किसी से कोई तक़ाज़ा नहीं किया उस ने
बनाई ज़िंदगी जिन की वो उस की मौत बने
ये दुख मुझे है कि अच्छा नहीं किया उस ने
फिर एक अस्र वो मस्जिद की सीढ़ियों पे ढला
तो बुझते दिल से भी शिकवा नहीं किया उस ने
- idris-babar
खाँसी और हिचकी का फ़र्क़
ग़ैर वाज़ेह होता है
अवाम के मसीहाओं और ख़ुदा के वकीलों को
मुअक्किल और दस्ताने नहीं मिलते
ज़मीन को वेंटीलेटर लगाने वालों को
ज़मीन को वेंटीलेटर लगाने की हिम्मत नहीं होती
हुजूम की भूक में ख़ौफ़
और ख़ौफ़ की मौत में भूक नहीं होती
दो मोहब्बत करने वालों के दरमियान
दो मोहब्बत करने वाले नहीं होते
ग़ैर वाज़ेह होता है
अवाम के मसीहाओं और ख़ुदा के वकीलों को
मुअक्किल और दस्ताने नहीं मिलते
ज़मीन को वेंटीलेटर लगाने वालों को
ज़मीन को वेंटीलेटर लगाने की हिम्मत नहीं होती
हुजूम की भूक में ख़ौफ़
और ख़ौफ़ की मौत में भूक नहीं होती
दो मोहब्बत करने वालों के दरमियान
दो मोहब्बत करने वाले नहीं होते
- arsalan-ahmad
बाबा-ए-कुल-अक़्वाम पूरी सदी
इसनूकर खेलते रहे
इसनूकर की सब से बेहतरीन गेंदें
गेंडे के सींग से बनती रहीं
कुछ अर्सा पहले
आख़िरी सफ़ेद गैंडा मारा गया
सुकूत-ए-गैंडा से
किसी क़ौम को फ़र्क़ नहीं पड़ा
आख़िरी इंसान मरने से
किसी सय्यारे को फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला
इसनूकर खेलते रहे
इसनूकर की सब से बेहतरीन गेंदें
गेंडे के सींग से बनती रहीं
कुछ अर्सा पहले
आख़िरी सफ़ेद गैंडा मारा गया
सुकूत-ए-गैंडा से
किसी क़ौम को फ़र्क़ नहीं पड़ा
आख़िरी इंसान मरने से
किसी सय्यारे को फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला
- arsalan-ahmad
कौन पहली मोहब्बत नहीं था
कौन आख़िरी मोहब्बत नहीं
कौन है जो पहली और आख़िरी मोहब्बत है
कौन सा बच्चा किस की औलाद है
कौन सी दौलत किस पर हलाल है
किस क़त्ल का सुराग़ किस ज़मीन में है
मुसल्लस कब से है और किन तीन में है
वबा के दिनों में
ज़रूरी होता है
वसिय्यत लिख रखना
कौन आख़िरी मोहब्बत नहीं
कौन है जो पहली और आख़िरी मोहब्बत है
कौन सा बच्चा किस की औलाद है
कौन सी दौलत किस पर हलाल है
किस क़त्ल का सुराग़ किस ज़मीन में है
मुसल्लस कब से है और किन तीन में है
वबा के दिनों में
ज़रूरी होता है
वसिय्यत लिख रखना
- arsalan-ahmad
मुख़्तसर कर जाती है ज़िंदगी को हर मुलाक़ात
बन जाता है मुरक्कब ख़ौफ़-ए-ख़ुदा में ख़ौफ़-ए-वबा
बढ़ जाती है अहमियत में मोहब्बत से मुदाफ़अत
खो बैठते हैं करंसी नोट तक अपनी वक़अत
रह जाता है जम्अ' बहुत सा मौत के बा'द का राशन
चली जाती हैं नक़ाबों तले खुली मुस्कुराहटें
मिट जाती है मुसाफ़हों और मुआनक़ों की मुलम्मा'-कारी
रूठ जाता है बदन से लम्स का रिज़्क़
दूर हो जाता है अपना चेहरा अपने हाथ से
मुकम्मल होती है वबा के दिनों में तन्हाई
बन जाता है मुरक्कब ख़ौफ़-ए-ख़ुदा में ख़ौफ़-ए-वबा
बढ़ जाती है अहमियत में मोहब्बत से मुदाफ़अत
खो बैठते हैं करंसी नोट तक अपनी वक़अत
रह जाता है जम्अ' बहुत सा मौत के बा'द का राशन
चली जाती हैं नक़ाबों तले खुली मुस्कुराहटें
मिट जाती है मुसाफ़हों और मुआनक़ों की मुलम्मा'-कारी
रूठ जाता है बदन से लम्स का रिज़्क़
दूर हो जाता है अपना चेहरा अपने हाथ से
मुकम्मल होती है वबा के दिनों में तन्हाई
- arsalan-ahmad
वबा के दिनों में मय्यत का ग़ुस्ल
जनाज़े का कंधा
और आख़िरी लम्हे का दीदार नहीं होता
लेकिन यही नहीं
इन दिनों क़ब्र के फूलों की
गुल-क़ंद नहीं बनाई जाती
लाश के बालों की विग नहीं बनती
कफ़न प्लास्टिक का होता है
जो चोरी नहीं होता
और कोई आदम-ख़ोर ज़िंदा नहीं बचता
जनाज़े का कंधा
और आख़िरी लम्हे का दीदार नहीं होता
लेकिन यही नहीं
इन दिनों क़ब्र के फूलों की
गुल-क़ंद नहीं बनाई जाती
लाश के बालों की विग नहीं बनती
कफ़न प्लास्टिक का होता है
जो चोरी नहीं होता
और कोई आदम-ख़ोर ज़िंदा नहीं बचता
- arsalan-ahmad