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उस ने तो यूँ ही पूछ लिया था कि कोई है

उस ने तो यूँ ही पूछ लिया था कि कोई है

abhinandan-pandey

मैं तिरे शोख़ लबों पर तो अभी आया हूँ

मैं तिरे शोख़ लबों पर तो अभी आया हूँ

abhinandan-pandey

ख़ुद-कुशी का फ़ैसला ये सोच कर हम ने किया

ख़ुद-कुशी का फ़ैसला ये सोच कर हम ने किया

abhinandan-pandey

खींच लाई जानिब-ए-दरिया हमें भी तिश्नगी

खींच लाई जानिब-ए-दरिया हमें भी तिश्नगी

abhinandan-pandey

जब यहाँ रहने के सब अस्बाब यकजा कर लिए

जब यहाँ रहने के सब अस्बाब यकजा कर लिए

abhinandan-pandey

चाहें तो इस को तेग़-ए-ख़मोशी से काट दें

चाहें तो इस को तेग़-ए-ख़मोशी से काट दें

abhinandan-pandey

चलो फ़रार-ए-ख़ुदी का कोई सिला तो मिला

चलो फ़रार-ए-ख़ुदी का कोई सिला तो मिला ...

abhinandan-pandey

ज़माने भर के दुखों को लगा लिया दिल से

ज़माने भर के दुखों को लगा लिया दिल से

ahmad-faraz

है बादा-गुसारों को तो मयख़ाने से निस्बत

है बादा-गुसारों को तो मयख़ाने से निस्बत

ahmad-faraz

अपनी आशुफ़्ता-मिज़ाजी पे हँसी आती है

अपनी आशुफ़्ता-मिज़ाजी पे हँसी आती है

ahmad-faraz

फिरते हैं अब भी दिल को गरेबाँ किए हुए

फिरते हैं अब भी दिल को गरेबाँ किए हुए ...

ahmad-faraz

आँखें

सुनो जाना ...

ahmad-ayaz

'उम्र भर पैकर-ए-एहसास में ढाले न गए

'उम्र भर पैकर-ए-एहसास में ढाले न गए ...

ahmad-ayaz

सुकूत-ए-जिस्म का एहसास जिस पैकर पे रक्खा था

सुकूत-ए-जिस्म का एहसास जिस पैकर पे रक्खा था ...

ahmad-ayaz

पहले इक पर्दा हमारे सामने डाला गया

पहले इक पर्दा हमारे सामने डाला गया ...

ahmad-ayaz

मोहब्बतों की शाख़ पे जो खिल रहा गुलाब है

मोहब्बतों की शाख़ पे जो खिल रहा गुलाब है ...

ahmad-ayaz

मिज़ाज रखते हो शा'इराना तो पास आना

मिज़ाज रखते हो शा'इराना तो पास आना ...

ahmad-ayaz

मौसम-ए-गिर्या-ए-सरशार में रो पड़ते हैं

मौसम-ए-गिर्या-ए-सरशार में रो पड़ते हैं ...

ahmad-ayaz

मस्ख़ अल्फ़ाज़ को जैसे हो म'आनी दरकार

मस्ख़ अल्फ़ाज़ को जैसे हो म'आनी दरकार ...

ahmad-ayaz

कर्ब है सोज़ है गिरानी है

कर्ब है सोज़ है गिरानी है ...

ahmad-ayaz
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