बेवफा शायरी

बेवफा पर शायरी

बेवफा को समर्पित एक सुलझी हुई शायरी संग्रह का आविष्कार करें। इन शब्दों को छुअटने दें जो धोखे और दिल के दर्द की भावनाओं को व्यक्त करते हैं।

तुम किसी के हो गए तो मै फ़ना हो जाऊंगा। बस किताबो में लिखा इक फ़लसफ़ा हो जाऊंगा।। गर जुदा रब ने किया तो कुछ नहीं बोलूंगा पर। जो जमाने ने किया तो ज़लज़ला हो जाऊंगा।। क़ब्र पर मेरी जो आकर तुम कभी आवाज़ दो। आपकी ख़ातिर मैं जिंदा हर दफ़ा हो जाऊंगा।। आज भी मेरी वफ़ा की कसमें खाता है जहां। बस तेरे कहने से क्या मैं बेवफ़ा हो जाऊंगा।। दूर कब तक तुम रहोगे है मुझे आख़िर पता। एक दिन शामिल तुझी में शर्तिया हो जाऊंगा।। कवि गोपाल पाठक (कृष्णा) बरेली
उप्र

-


कभी उसने भी हमें चाहत का पैगाम लिखा था

403
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था


सुना है आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है
जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था।

-


किसी की खातिर मोहब्बत की इन्तेहाँ कर दो

लेकिन इतना भी नहीं कि उसको खुदा कर दो



मत चाहो किसी को टूट कर इस कदर इतना

कि अपनी वफाओं से उसको बेवफा कर दो।

-


क्या वफा होती है?
काश तुम जान जाती ...
ना हम
ना तुम अकेली होती ।

-


बेवफाओं की दुनिया से लफ्जों को आज भी शिकायत है......
जान बूझ कर इस्तेमाल नहीं करते
फिर लगाते तोहमत है . ! !

-


मेरे दिल की दुनिया पे तेरा ही राज था।
कभी तेरे सीर पर भी वफाओ का ताज था।
तूने मेरा दिल तोडा पर पता न चला तुझको।
क्योंकि टुटा दिल दीवाने का बे आवाज था।

-


रस्मे उल्फत को निभाए तो निभाए कैसे

हरतरफ आग है
दामन को बचाए कैसे।


बोझ होता जो गमों का तो उठा भी लेते

जिंदगी बोझ बनी तो फिर उठाए कैसे।

-


तुझे तो हमारी मोहब्बत ने मशहूर कर दिया बेवफ़ा
वरना तू सुर्खियों में रहे
तेरी इतनी औकात नहीं!!!

-


गुजारिश हमारी वह मान न सके

मज़बूरी हमारी वह जान न सके



कहते हैं मरने के बाद भी याद रखेंगे

जीते जी जो हमें पहचान न सके.

-


प्यार करने का हुनर हमें नहीं आता

इसलिए प्यार की बाज़ी हम हार गए



हमारी ज़िन्दगी से उन्हें बहुत प्यार था

सायद इसलिए हमे ज़िंदा ही मार गए!

-


मुझको बेवफा बनाकर जाने वाले
मुझसे वफ़ा का अब ख्वाब न रख
मैं तो डूब ही चुकी थी तुझमे
मेरे फिर डूबने का ख्वाब न रख


और मुझको साहिल पर तनहा छोड़के जाने वाले
औकात में जरा अपनी मजाल को रख ||

-


एक फूल का दर्द उसकी जुकि डाली समजते हे

बाग की बात बाग का माली ही समजते हे



ये किस तरह की रात बनाई हे दुनियावाले ने

दिए का दिल जलता हे और लोग रोशनी समजते हे

-


बिछड़ के तुमसे ज़िन्दगी सज़ा लगती है
ये सांस भी जैसे मुझसे ख़फ़ा लगती है
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किससे करूँ
मुझको तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफा लगती है.

-


बेवफा तेरा मासुम चेहरा
भुल जाने के काबिल नही।
है मगर तु बहुत खुबसुरत
पर दिल लगाने के काबिल नही.

-


तेरी रूह का मेरी रूह से निकाह हो
गया हैं जैसे..
तेरे सिवा किसी और का सोचूं तो
नाजायज़ सा लगता है!!!

-


सारी उम्र आँखों में एक सपना याद रहा

सदियाँ बीत गयी पर वो लम्हा याद रहा



जाने क्या बात थी उसमें और मुझ में
सारी महफ़िल भूल गए बस वही एक चेहरा याद रहा...

-


झांखकर देखा होता एक बार तो डोली के अंदर

के हो गया हैं अब मेरी भी ज़िंदगी का पूरा सफर
तेरे साथ साथ अब मेरी भी मंज़िल ख़त्म हो गयी


बताने ना दिया तूने और कह दिया तू बेवफा हो गयी...

-


मैं फ़रमाईश हूँ उसकी

वो इबादत है मेरी



इतनी आसानी से कैसे
निकाल दू उसे अपने दिल से

मैं ख्वाब हूँ उसका



वो हकीकत है मेरी|

-


वो तो अपना दर्द रो-रो कर सुनाते रहे

हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे



हमें ही मिल गया खिताब-ए-बेवफा क्योंकि

हम हर दर्द मुस्कुरा कर छुपाते रहे।

-


हमें देख कर जब उसने मुँह मोड़ लिया

एक तसल्ली हो गयी चलो पहचानते तो हैं।

-


दर्द आँखों से निकला तो सबने बोला कायर है ये

जब दर्द लफ़्ज़ों से निकला तो सब बोले शायर है ये!!

-


चांद ने की होगी सुरज से मोहब्बत

इसलिए तो चांद में दाग है



मुमकिन है चांद से हुई होगी

बेवफाई इसलिए तो सुरज में आग है



आई लव यू जान

-


वो करते हैं बात इश्क़ की

पर इश्क़ के दर्द का उन्हें एहसास नहीं



इश्क़ वो चाँद है जो दिखता तो है सबको

पर उसे पाना सब के बस की बात नही..!

-


मत सोच कि मैं तुझे भुला नहीं सकता

तेरी यादों के पन्ने मैं जला नहीं सकता



कश्मकश ये है कि खुद को मारना होगा

और अपने सुकून की खातिर
तुझे रुला नहीं सकता|

-


हमने चाहा था जिसे उसे दिल से भुलाया न गया

जख्म अपने दिल का लोगों से छुपाया न गया



बेवफाई के बाद भी प्यार करता है दिल उनसे

कि बेवफाई का इल्ज़ाम भी उस पर लगाया न गया।

-