ब्रेकअप शायरी

ब्रेकअप पर भावुक शायरी

ब्रेकअप के चारों ओर घूमने वाले एक दुखद संग्रह की खोज करें। इन छंदों में सुकून की स्रोत बनें और कवितात्मक शब्दों के माध्यम से ब्रेकअप के बाद के भावनात्मक सफ़र को व्यक्त करने का एक तरीका पाएं।

बडी अजीब मुलाकातें होती थी हमारी ।
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वो मतलब से मिलते थे
और हमे मिलने से मतलब था ।

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उनका रोज का गुस्सा करना

मेरा रोज का मानना



थक स गया हूँ अब

कोई और ही मिला दो अब

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वो लड़के से कहती है-तुम मुझे भूल जाओ..मैं अब किसी और की होने जा रही हूँ..कल मेरी शादी है.. लड़का चुपचाप उसे देखता रहता है..लड़की फिर कहती है- कुछ बोलोगे नहीं..लड़का मुस्कुराता है..और कहता है-गौर से पढ़िए.. कोई तुमसे मेरा नाम जो ले
कह देना पागल लड़का था

इस झूठी दुनिया में मुझसे


जो सच्ची मोहब्बत करता था

मेरे रूठने पे वो रो देता
मेरीh डांट पे भी खुश हो लेता



जब सारे साथ छुड़ा लेते
चुपके से साथ वो हो लेता



हिम्मतवाला था यूँ तो पर
मुझको खोने से डरता था

कोई तुमसे मेरा नाम जो ले


कह देना पागल लड़का था

मुझसे मिलने की खातिर वो
बारिश में भीगकर आता था



जिस रोज मैं खाना न खाऊं
उस दिन उपवास मनाता था



कोई और नहीं था उसका बस
मुझसे ही जीता- मरता था

कोई तुमसे मेरा नाम जो ले


कह देना पागल लड़का था

गलती मेरी भी होने पर
माफ़ी की गुजारिश करता था



हर हाल में मैं हंसती जाऊं
इस कोशिश में बस रहता था



मैं कैसे उसकी हो जाऊं
हर पल ये सोचा करता था

कोई तुमसे मेरा नाम जो ले


कह देना पागल लड़का था

मेरे लाख मना करने पर भी
मेरा नाम जोर से लेता था



मेरी एक हंसी की खातिर वो
कुछ गाने भी गा देता था



मेरा हाथ पकड़ दुनिया से वो
लड़ने की बातें करता था

कोई तुमसे मेरा नाम जो ले


कह देना पागल लड़का था

मुझसे मिलने से पहले वो
दुनिया में बहुत अकेला था



जब पहली बार उसे देखा
चेहरे पे दर्द का मेला था



मेरे साथ में थी वो बात की वो
हरदम ही हँसता रहता था

कोई तुमसे मेरा नाम जो ले


कह देना पागल लड़का था

जब नींद मुझे आ जाती थी
वो डांट के मुझे सुलाता था



अपनी पगलाई बातों से
अक्सर वो मुझे रुलाता था



उसका जीवन बिखरा था पर
मेरा ख़याल वो रखता था

कोई तुमसे मेरा नाम जो ले


कह देना पागल लड़का था

कुछ मजबूरी के चलते जब
मैंने उससे हाथ छुड़ाया था



उसने न कोई शिकायत की
बस धीरे से मुस्काया था



मेरी यादों में रातों में
उठ उठकर रोया करता था

कोई तुमसे मेरा नाम जो ले


कह देना पागल लड़का था

वो पागल लड़का तन्हा ही
मेरी यादों से लड़ता है



मेरे बिन जिंदा रहने की
नाकाम वो कोशिश करता है



वो आज भी मुझपे मरता है
वो कल भी मुझपे मरता था

कोई तुमसे मेरा नाम जो ले


कह देना पागल लड़का था

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चाहा था उसे इसलिए तो पा लिए अगर मोहब्बत होती तो कब k बिछड़ गए होते।

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डूबी हे मेरी उंगलिया खुद अपने लहू में
ये कांच के टुकडो को उठाने की सजा हे !

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ये और बात कि वो निबाह ना सका मग़र जो किए थे उसने वो वादे ग़ज़ब के थे.

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दिया बनकर जिसने घर
रोशन किया उसी ने घर जल दिया

धड़कन समझकर जिसे


दिल में बसाया उसी ने दिल तोड़ दिया.

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सोचा था तुझपे प्यार लुटाकर तेरे दिल में घर बनायेंगे…..
हमे क्या पता था दिल देकर भी हम बेघर रह जाएँगे.…..

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तुझे चाहा रब से भी ज्यादा फिर भी ना तुझे पा सके
रहे तेरे दिल में मगर तेरी धडकन तक ना जा सके
जुड़के भी तुटी रहि ईश्क कि डोर वे
किस्मत के मारे असी कि करीये किस्मत पे किसका जोर

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लिखी है खुदा ने मोहब्बत सबकी तक़दीर में

हमारी बारी आई तो स्याही ही ख़त्म हो गई।

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जिनके चाहने वाले हो हज़ारो उसे क्या फरक पड़ेगा जो कोई एक उसकी ज़िंदगी से चला जाये.

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मोहब्बत में लाखों ज़ख़्म खाए हमने
अफ़सोस उन्हे हम पर ऐतबार नही...
मत पूछो क्या गुज़रती है दिल पर



जब वो कहते हैं उन्हे हमसे प्यार नही.....!!!

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सपना कभी साकार नही होता
मोहब्बत का कोई आकर नही होता
सूब कुछ होजता है इस दूनीया में मगर
दुबारा किसी से सच्चा प्यार नही होता

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जा जाकर धडक उसके सीने में ए दिल

मै उसके बिना जी रहा हु तो तेरे बिना भी जी लूँगा.

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बच न सका ख़ुदा भी मोहब्बत के तकाज़ों से

एक महबूब की खातिर सारा जहाँ बना डाला..

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उसका सपना ही देखा था मेने साथ छूटने का

किस्मत देखो सपना पहली बार सच हो गया मेरा.

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कांटे की तरह चुभ रही है जिंदगी पता है क्यूँ...?
तेरी हर एक बात आज याद आ रही है.

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वही हुआ न तेरा दिल

भर गया मुझसे कहा था
न ये मोहब्बत नहीं हैं


जो तुम करती हो!

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मैंने कुछ इस तरह से खुद को संभाला है

तुझे भुलाने को दुनिया का भरम पाला है



अब किसी से मुहब्बत मैं नहीं कर पाता

इसी सांचे में एक बेवफा ने मुझे ढाला है.

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अब कभी हम ना मिलेंगे
एक बार जुदा होने के बाद
अब बता देना मुश्किलों को भी
नया घर तलाश कर लो


सारी मुश्किलें ख़त्म हो जाएँगी
तुझसे बिछड़ने के बाद

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चले आज तुम ज़हां से ह्ई ज़िन्दगी पराई...!
तुम्हे मिल गया ठिकाना हमे मौत भी ना आई...!!
ओ दूर के मुसफिर हमको भी साथ लेले रे...
हमको भी साथ लेले हम रह गये एकले.....!!!

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मिले ना फूल तो कांटो से जख्म खाना है

उसी गली में मुझे बार बार जाना है।
मैं अपने खून का इल्जाम दूं तो किसको दूं



लिहाज यह है कि कातिल से दोस्ताना है।

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देख मेरी अॉखो मे ख्वाब किसके है
दिल में मेरे सुलगते तूफान किसके है
नही गुजरा कोई आज तक इस रास्तो से
फिर भी कदमो के ये निशान किसके है

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मेरा यूँ टुटना और टूटकर बिखर जाना
कोई इत्फाक नहीं

किसी ने बहुत कोशिश की है


मुझे इस हाल तक पहुँचाने में..!!

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सुनो...
लौट आओ न तुम....
कहीं पागल ही न हो जाऊँ मैं....
खुद से बातें करते करते....

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