भावनाएँ शायरी

भावनात्मक शायरी

विभिन्न भावनाओं की महक को कैद करने वाले गहने शायरी संग्रह की खोज करें। इन बंदों से मानव भावनाओं और संवेदनाओं की व्यापकता को कवितात्मक रूप से व्यक्त करें।

ताजमहल की ये कहानी
अनगिनत रोमांस से भरी
मोमबत्ती की रौशनी में
जलते हैं इश्क के दीवाने। प्रेम का बयान करते


मर्मस्पर्शी मोमबत्तियों के रंग
ताजमहल की महक में
बजते हैं प्रेम के गीत यहाँ। जो चुप बयाँ करता
ताज का यह इतिहास है


मोहब्बत का आबाद किया
मार्बलों के शहर में हमने। ताजमहल का सौंदर्य
अनगिनत राहतों का आवाज़ है
प्रेम के पवित्र अनुभवों की कहानी


ताजमहल की ये निवास है।

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हे पुरुष
जब मेघ सदृश्य हो गरजते फिर मेह समान तुम बरसते जल में भीगी एक मशाल से न बुझते ही हो न तुम जलते कदाचित प्रतीत तुम्हें मात्र मैं दुर्बल अबला दुखियारी तेरी सहस्त्र गर्जनाओं पर है सदैव मेरा एक मौन भारी दृष्टिकोण क्यों स्वार्थ भरा निभा प्रत्येक दायित्व मेरा किंचित विलंब से है उदित स्वावलंबन का आदित्य मेरा अथक यत्न और परिश्रम से एकत्रित आत्मशक्ति सारी अंतर्मन की किसी कंदरा में जीवित रख छोड़ी चिंगारी सहनशील एवं करुणामयी प्रत्येक स्त्री का गौरव क्षमा किंतु स्मरण ये रहे अवश्य स्त्री से संभव सृष्टि रचना व्यर्थ है ये पुरुषार्थ तुम्हारा भावना यदि अहम से हारी निर्लज्ज समाज मौन जब बनी रणचंडी बांध कटारी मैं मातृशक्ति हूँ मैं भगिनी मैं सखी मैं ही सहगामिनी सर्व स्वरूप हैं आदरणीय समझो न केवल कामिनी मैं लक्ष्मी और मैं सरस्वती मैं ही देवी कालिका संहारी सृजन कभी तो मर्दन कभी मैं नारी
मैं नारी
मैं नारी!!!

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मुहब्बत मूकदर है कोई ख्वाब नही। वो अदा है जिसमे सब कामयाब नही। जिन्हे इश्क की पनाह मिली वे चंद है
जो पागल हुए उनका कोई हिसाब नही। तुम्हारी सूरत को देखूं तो हीरा कोहिनूर लगती हो। तुम कोई बडी हस्ती हो
इस तरह मशहूर लगती हो। चंचल
शोख अदाएं हैं तेरी


सो जन्नत की हूर लगती हो। पर
इस तारीफ को तुम सच्चाई न समझना
हकीकत में तुम इनसे काफी दूर लगती हो।

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क्या खूब मोहब्बत की वफ़ा कर गया मुझे छोड़ने से पहले मेरे लिया दुआ कर गया अगर वक़्त का गुनाह है तो सज़ा वक़्त को मिले मेरे खुदा वो क्यों मुझे रुका रुका सा थमा थमा सा कर आया क्या खूब मोहब्बत की वफ़ा कर गया मुझे छोड़ने से पहले मेरे लिया दुआ कर गया ..

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खुशी मिली तो हँस ना सके
गम मिला तो रो ना सके
ज़िन्दगी का भी ये कैसा दस्तूर
जिसे चाहा उसे पा ना सके


जिसे पाया उसे चाह ना सके.......

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जय श्री राधे: राम युग में दूध मिला कृष्ण युग में घी कलयुग में सिर्फ चाय मिली फूंक फूंक के पी

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बहुत मुश्किल नहीं हैं
ज़िंदगी की सच्चाई समझना
" जिस तराज़ू पर दूसरों को तौलते हैं
उस पर कभी ख़ुद बैठ के देखिये। जय माँ भगवती

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अलविदा कहकर जब वो चल दिए
आँखों ने सारे हसीन ख्वाब खो दिए
गम ये नही की वो मुझे छोड़ गये
दर्द तो तब हुआ जब अलविदा कहकर वो खुद रो दिए.

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किन लफ़्ज़ों में इतनी कडवी कसिली बात लिखूं
मैं सच लिकूँ के अपने हालत लिखूं
कैसे लिखूं मैं चांदनी रातें
जब गरम हो रेत तो कैसे मैं बरसात लिखूं .

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नजरें मिलती हैं पर नजारे नहीं मिलते। बेसहारों को कहीं सहारे नहीं मिलते। जिंदगी इक नदी है
तैरते ही जाइए
डूबते इंसान को किनारे नहीं मिलते।

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कलम उठाई है
लफ्ज नहीं मिलता। जिसको ढूंढो
वो शख्स नहीं मिलता। फिरते है वे जमाने की तलाश में
हमारे लिए उन्हें वक्त नहीं मिलता।

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जब कोई ख्याल दिल से टकराता है ॥ दिल ना चाह कर भी
खामोश रह जाता है ॥ कोई सब कुछ कहकर
प्यार जताता है॥ कोई कुछ ना कहकर भी
सब बोल जाता ह

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जो अकेला हो उससे तन्हा नही कहते
ना जाने उसके दिल मे कितने महफ़िल आबाद हो

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आज टूट गया तो बच बच कर निकलते हो.
कल आईना था तो रुक-रुक कर देखते थे....!!

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