LORI SHAYARI: कविता के लोरियों का स्वागत करें

LORI SHAYARI की शांति का अनुभव करें

Lori shayari की शांतिपूर्ण वातावरण में डूबें जहाँ कविता की सुरीली लोरियां आपको गहरे शांति में ले जाती हैं। इस लौलियात के शब्द आपकी आत्मा को स्पर्श करते हैं और शांति और आराम की भावना उत्पन्न करते हैं जब आप कविता के सुखद पंक्तियों में लिपटते हैं।

मैं गाऊँ तुम सो जाओ
मैं गाऊँ तुम सो जाओ
सुख सपनों में खो जाओ
माना आज की रात है लम्बी


माना दिन था भारी
पर जग बदला
बदलेगी एक दिन तक़दीर हमारी
उस दिन के ख़्वाब सजाओ


मैं गाऊँ तुम सो जाओ
कल तुम जब आँखें खोलोगे
जब होगा उजयारा
ख़ुशियों का संदेशा ले कर


आएगा सवेरा प्यारा
मत आस के दीप बुझाओ
मैं गाऊँ तुम सो जाओ
जी करता है जीते जी


मैं यूँ ही गाता जाऊँ
गर्दिश में थके हारों का
माथा सहलाता जाऊँ
फिर इक दिन तुम दोहराओ


सुख सपनों में खो जाओ
मैं गाऊँ तुम सो जाओ

- shailendra


नींद क्या मीठी है आ इस का मज़ा ले सो जा
ख़्वाब-ए-राहत का ज़रा लुत्फ़ उठा ले सो जा
सो जा सो जा ओ मिरे नाज़ों के पाले सो जा
रात-दिन झूले में ऐ झूलने वाले सो जा


ऐ मिरे चाँद मिरे घर के उजाले सो जा
भोले-भाले मिरे प्यारे मिरे बाले सो जा
कभी बेकार नहीं जाता है इस्लाम का वक़्त
होता हर वक़्त का इक काम है हर काम का वक़्त


खेलने के लिए है सुब्ह का या शाम का वक़्त
काम के वास्ते दिन रात है आराम का वक़्त
ऐ मिरे चाँद मिरे घर के उजाले सो जा
भोले-भाले मिरे प्यारे मिरे बाले सो जा


- mohammad-husain-azad


रात आ गई चमन के नज़ारे भी सो गए
नदिया को नींद आ गई धारे भी सो गए
नीले गगन के राज-दुलारे भी सो गए
सोया हुआ है चाँद सितारे भी सो गए


नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
चम्पा भी सो गई है सलीमा भी सो गई
अब्बा भी महव-ए-ख़्वाब हैं आपा भी सो गई


गुड़िया की चोर कल-मुई अज़रा भी सो गई
ले अब तो तेरी नन्ही भी मैना भी सो गई
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में


कल फिर सुनाऊँगी तुझे सच्ची कहानियाँ
रूस और चीन देस के लोगों की दास्ताँ
जिन की वतन-परस्त जवाँ-साल लड़कियाँ
मर्दों से बढ़ के अपने वतन की हैं पासबाँ


नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
चुप-चाप और ख़मोश है हर एक रहगुज़र
पंछी भी सो रहे हैं दरख़्तों पे बे-ख़बर


अब देर हो चुकी है मिरे लाल ज़िद न कर
जाना है मदरसे तुझे कल सुब्ह वक़्त पर
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में


कल सुब्ह जब मैं पास के बाज़ार जाऊँगी
'सिराज' और 'टीपू' की तस्वीर लाऊँगी
और उन की ज़िंदगी की कहानी सुनाऊँगी
तुझ को भी वैसी शान से जीना सिखाऊँगी


नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में
फूलों की शाहज़ादियाँ बाग़ों की रानियाँ
जाएँगी ख़्वाब में तिरे हम-राह गुल्सिताँ


और ढूँड कर तिरे लिए लाएँगी तितलियाँ
हैं तेरे इंतिज़ार में ख़्वाबों की वादियाँ
नींदें घुली हुई हैं नशीली हवाओं में
सो जा रे लाडले मिरे आँचल की छाओं में


- sahir-ludhianvi