नात शायरी
कविता के माध्यम से श्रद्धा का व्यक्तिकरण
पैगंबर मुहम्मद और उनके उपदेशों के प्रति प्यार, सम्मान और सराहना का अभिव्यक्ति करने के लिए समर्पित नात शायरी के भक्तियात्मक दुनिया में एक नामी करें। इस संग्रह में प्रत्येक पंक्ति पैगंबर के लिए प्रेम, सम्मान और आदर दिखाती है, जो कवितात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से भक्ति और श्रद्धा को प्रकट करती है।
हम हैं तुम्हारे तुम हो हमारे
मोहम्मद प्यारे
तुम हो चाँद और हम हैं तारे
मोहम्मद प्यारे
सब से अच्छा दीन तुम्हारा
हुक्म-ए-ख़ुदा आईन तुम्हारा
तुम ने हमारे ज़ेहन सँवारे
मोहम्मद प्यारे
प्यार सिखाया अद्ल सिखाया
रंग-ओ-नस्ल का फ़र्क़ मिटाया
दूर किए सारे अँधियारे
मोहम्मद प्यारे
बंदों को मौला से मिलाया
क़तरों को दरिया से मिलाया
मोड़े तुम ने वक़्त के धारे
मोहम्मद प्यारे
गुमराहों को राह दिखाई
क़ातिल भी ठहरे शैदाई
तुम जीते और दुश्मन हारे
मोहम्मद प्यारे
सुन्नत और क़ुरआन पे चल के
कहलाएँ शहकार अमल के
माँगें दुआ हम मिल के सारे
मोहम्मद प्यारे
मोहम्मद प्यारे
तुम हो चाँद और हम हैं तारे
मोहम्मद प्यारे
सब से अच्छा दीन तुम्हारा
हुक्म-ए-ख़ुदा आईन तुम्हारा
तुम ने हमारे ज़ेहन सँवारे
मोहम्मद प्यारे
प्यार सिखाया अद्ल सिखाया
रंग-ओ-नस्ल का फ़र्क़ मिटाया
दूर किए सारे अँधियारे
मोहम्मद प्यारे
बंदों को मौला से मिलाया
क़तरों को दरिया से मिलाया
मोड़े तुम ने वक़्त के धारे
मोहम्मद प्यारे
गुमराहों को राह दिखाई
क़ातिल भी ठहरे शैदाई
तुम जीते और दुश्मन हारे
मोहम्मद प्यारे
सुन्नत और क़ुरआन पे चल के
कहलाएँ शहकार अमल के
माँगें दुआ हम मिल के सारे
मोहम्मद प्यारे
- muzaffar-warsi
आप महबूब-ए-ख़ुदा या-मुस्तफ़ा
हो गया दिल आप का या-मुस्तफ़ा
वो हक़ीक़त में कहा अल्लाह ने
आप ने जो कुछ कहा या-मुस्तफ़ा
आप पर और आप के फ़रमान पर
जान-ओ-दिल से हम फ़िदा या-मुस्तफ़ा
आप के नक़्श-ए-क़दम पर हम चलें
आप सब के रहनुमा या-मुस्तफ़ा
वालियान-ए-मुल्क सुल्ताँ ताजवर
आप के दर के गदा या-मुस्तफ़ा
उम्मतों में अफ़ज़ल उम्मत आप की
आप शाह-ए-अंबिया या-मुस्तफ़ा
दीन-ए-हक़ की आप ने ता'लीम दी
आप हक़ हैं हक़-नुमा या-मुस्तफ़ा
आप ही ने तो किया इंसान को
ख़ुद-निगर ख़ुद-आश्ना या-मुस्तफ़ा
आप पर हैं ख़त्म सारी अज़्मतें
था न होगा आप सा या-मुस्तफ़ा
हर घड़ी मैं आप पर भेजूँ दरूद
दिल कहे सल्ले-अला या-मुस्तफ़ा
हो गया दिल आप का या-मुस्तफ़ा
वो हक़ीक़त में कहा अल्लाह ने
आप ने जो कुछ कहा या-मुस्तफ़ा
आप पर और आप के फ़रमान पर
जान-ओ-दिल से हम फ़िदा या-मुस्तफ़ा
आप के नक़्श-ए-क़दम पर हम चलें
आप सब के रहनुमा या-मुस्तफ़ा
वालियान-ए-मुल्क सुल्ताँ ताजवर
आप के दर के गदा या-मुस्तफ़ा
उम्मतों में अफ़ज़ल उम्मत आप की
आप शाह-ए-अंबिया या-मुस्तफ़ा
दीन-ए-हक़ की आप ने ता'लीम दी
आप हक़ हैं हक़-नुमा या-मुस्तफ़ा
आप ही ने तो किया इंसान को
ख़ुद-निगर ख़ुद-आश्ना या-मुस्तफ़ा
आप पर हैं ख़त्म सारी अज़्मतें
था न होगा आप सा या-मुस्तफ़ा
हर घड़ी मैं आप पर भेजूँ दरूद
दिल कहे सल्ले-अला या-मुस्तफ़ा
- muzaffar-warsi