आत्मिक शेर-ओ-शायरी
कविता की दुनिया में डुबकी लगाएं
शेर-ओ-शायरी की मंगलमयी दुनिया में डूबकर देखें, जहां कवितात्मक पंक्तियाँ और दिल को छू जाने वाली भावनाएँ सुंदरता से मिली हुई हैं। शब्दों की मेलोडिक ध्वनि और भावनाओं की गहराई आपके संवेदनाएँ मोहित करेंगी और आपके अंदर अनेक भावनाएँ उत्पन्न करेंगी।
मीर
मोमीन
ग़ालिब
इक़बाल अब जिन्दा कहाँ... इन्हें बर्दास्त कहाँ उनपे फक्र कहाँ
आज जो हम हैं क्या ताज्युब जब हैं तो ज़माने को कद्र कहाँ! ©- ‘कलमगीर' (अक्रम कोलकातवी)
मोमीन
ग़ालिब
इक़बाल अब जिन्दा कहाँ... इन्हें बर्दास्त कहाँ उनपे फक्र कहाँ
आज जो हम हैं क्या ताज्युब जब हैं तो ज़माने को कद्र कहाँ! ©- ‘कलमगीर' (अक्रम कोलकातवी)
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प्यार जब मिलता नहीं तोह होता ही क्यूँ हैं …………
अगर ख्वाब सुच नहीं होते तो इंसान सोता क्यूँ है
जब यही प्यार आंखो के सामने किसी और का हो जाये
तो फिर यह पागल दिल इतना रोता क्यूँ हैं …….
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उसके लिए सारी दुनिया से बगावत की थी
याद आती है मैंने भी मोहब्बत की थी
उसको छोड़ के हस्ते हुए घर आकर
इतना रोये थे की आंखो ने भी शिकायत की थी
इतना रोये थे की आंखो ने भी शिकायत की थी
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दुःख में खुशी की वजह बनती है मोहब्बत
दर्द में यादो की वजह बनती है मोहब्बत जब कुछ भी अछा नै लगता हमे दुनिया में तब हमारे जीने की वजह बनती है मोहब्बत
दर्द में यादो की वजह बनती है मोहब्बत जब कुछ भी अछा नै लगता हमे दुनिया में तब हमारे जीने की वजह बनती है मोहब्बत
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जुबां खामोश आँखों में नमी होगी
यही बस मेरी एक दास्ताँ -इ -ज़िन्दगी होगी
भरने को तोह हर ज़ख़्म भर जायेगा
कैसे भरेगी वो जगह जहा तेरी कमी होगी
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आँखोँ से बरसात होती हैं
जब आपकी याद साथ होती है
जब भी बिजी रहे मेरा सेल तो समझ लेना आपकी होने वाली भाभी से मेरी बात होती हैं
जब भी बिजी रहे मेरा सेल तो समझ लेना आपकी होने वाली भाभी से मेरी बात होती हैं
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प्यार करो तो धोखा मत देना
प्यार को आंसू का तोहफा मत देना दिल से रोये कोई तुम्हे याद कर के ऐसा कभी किसी को मौका मत देना
प्यार को आंसू का तोहफा मत देना दिल से रोये कोई तुम्हे याद कर के ऐसा कभी किसी को मौका मत देना
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एक कब्रिस्तान के बाहर लिखा था -
"सैकड़ों दफन है यहाँ
जो सोचते थे के दुनिया उनके बिना नहीं चल सकती
जो सोचते थे के दुनिया उनके बिना नहीं चल सकती
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न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने की
अब वजह नही मिलती मुस्कुराने की.
अब वजह नही मिलती मुस्कुराने की.
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मेरी बात सुन पगली
अकेले हम ही शामिल नही है इस जुर्म में....
जब नजरे मिली थी तो मुस्कराई तू भी थी...!!!!!
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ज़रूरत’ दिन निकलते ही निकल पड़ती है ‘डयूटी’ पर
‘बदन’ हर शाम कहता है कि अब ‘हड़ताल’ हो जाए ।।
‘बदन’ हर शाम कहता है कि अब ‘हड़ताल’ हो जाए ।।
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कागज़ के नोटों से आखिर किस किस को खरीदोगे...
किस्मत परखने के लिए यहाँ आज भी
सिक्का हीं उछाला जाता है
सिक्का हीं उछाला जाता है
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पहना रहे हो क्यूँ मुझे तुम काँच का लिबास...
"बच गया है क्या फिर कोई पत्थर तुम्हारे पास.".!!
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रिमझिम तो है मगर सावन गायब है
बच्चे तो हैं मगर बचपन गायब है..!! क्या हो गयी है तासीर ज़माने की यारों अपने तो हैं मगर अपनापन गायब है !
बच्चे तो हैं मगर बचपन गायब है..!! क्या हो गयी है तासीर ज़माने की यारों अपने तो हैं मगर अपनापन गायब है !
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लोग कहते हैं वक्त के साथ सब कुछ बदल जाता है…
फिर न जाने क्यूँ छिपकर ज़िंदा रह जाती है ये मोहब्बत
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कुछ सपनों को पूरा करने निकले थे गाँव से
किसको पता था कि गाँव जाना ही एक सपना बन जायेगा.
किसको पता था कि गाँव जाना ही एक सपना बन जायेगा.
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सिर्फ लफ़्ज़ों को न सुनो
कभी आँखें भी पढो .. कुछ सवाल बड़े खुद्दार हुआ करते है…
कभी आँखें भी पढो .. कुछ सवाल बड़े खुद्दार हुआ करते है…
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कुछ चीजें कमजोर हिफाजत में भी महफूज रहती है
जैसे मिट्टी के गुलक में लोहे के सिक्के..!!
जैसे मिट्टी के गुलक में लोहे के सिक्के..!!
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अब उठती नहीं हैं आँखें
किसी और की तरफ.
पाबन्द कर गयीं हैं शायद
किसी की नज़रें मुझे.
किसी और की तरफ.
पाबन्द कर गयीं हैं शायद
किसी की नज़रें मुझे.
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मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली यारो..
वरना हम करके बताते नफरत किस को कहते है|
वरना हम करके बताते नफरत किस को कहते है|
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राख से भी आयेगी खुशबू मोहब्बत की
मेरे ख़त को तुम यूँ सरेआम जलाया न करो l
मेरे ख़त को तुम यूँ सरेआम जलाया न करो l
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बहुत रोये वो हमारे पास आके..
जब एहसास हुआ अपनी गलती का..
चुप तो करा देते हम
अगर चहरे पे हमारे कफन ना होता !!
जब एहसास हुआ अपनी गलती का..
चुप तो करा देते हम
अगर चहरे पे हमारे कफन ना होता !!
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मुझको क्या हक़ मैं किसी को मतलबी कहूँ
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मै खुद ही ख़ुदा को मुसीबत में याद करता हूँ !
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मै खुद ही ख़ुदा को मुसीबत में याद करता हूँ !
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