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क्या ख़बर कौन सा रस्ता तिरी जानिब निकले

क्या ख़बर कौन सा रस्ता तिरी जानिब निकले

badr-muneer

कुंज-ए-हैरत से चले दश्त-ए-ज़ियाँ तक लाए

कुंज-ए-हैरत से चले दश्त-ए-ज़ियाँ तक लाए

badr-muneer

कोई भी सुर में नहीं है 'मुनीर' क्या कीजे

कोई भी सुर में नहीं है 'मुनीर' क्या कीजे

badr-muneer

करनी पड़ जाए वज़ाहत पे वज़ाहत लेकिन

करनी पड़ जाए वज़ाहत पे वज़ाहत लेकिन

badr-muneer

कहाँ से हम अपनी गर्दिशों का जवाज़ ढूँडें

कहाँ से हम अपनी गर्दिशों का जवाज़ ढूँडें

badr-muneer

कचरे से उठाई जो किसी तिफ़्ल ने रोटी

कचरे से उठाई जो किसी तिफ़्ल ने रोटी

badr-muneer

कब से पहुँच गया हूँ मैं उस शख़्स के क़रीब

कब से पहुँच गया हूँ मैं उस शख़्स के क़रीब

badr-muneer

जीवन है सड़क और किनारे पे खड़े हैं

जीवन है सड़क और किनारे पे खड़े हैं

badr-muneer

जिस मंज़र का हिस्सा तेरी ज़ात नहीं

जिस मंज़र का हिस्सा तेरी ज़ात नहीं

badr-muneer

जब वस्ल का आएगा तिरे साथ सनम दिन

जब वस्ल का आएगा तिरे साथ सनम दिन

badr-muneer

गो हर्फ़-ओ-अश्क दोनों थे सामान-ए-गुफ़्तुगू

गो हर्फ़-ओ-अश्क दोनों थे सामान-ए-गुफ़्तुगू

badr-muneer

एक उम्मीद के सहारे पर

एक उम्मीद के सहारे पर

badr-muneer

चराग़ अंदर की साज़िशों से बुझे हुए हैं

चराग़ अंदर की साज़िशों से बुझे हुए हैं

badr-muneer

बूढ़े कमज़ोर वालदैन के साथ

बूढ़े कमज़ोर वालदैन के साथ

badr-muneer

बे-चेहरा इंसानों की इस बस्ती में

बे-चेहरा इंसानों की इस बस्ती में

badr-muneer

बन गए इंसान अपनी ज़ात में जंगल 'मुनीर'

बन गए इंसान अपनी ज़ात में जंगल 'मुनीर'

badr-muneer

और क्या मफ़्हूम होगा ख़ुद-फ़रेबी के सिवा

और क्या मफ़्हूम होगा ख़ुद-फ़रेबी के सिवा

badr-muneer

ज़र्ब-ए-ताज़ा-कारी है हादिसा पुराना है

ज़र्ब-ए-ताज़ा-कारी है हादिसा पुराना है ...

badiuzzaman-sahar

वो दर्द तुम ने दिया है कि बे-क़रार चले

वो दर्द तुम ने दिया है कि बे-क़रार चले ...

badiuzzaman-sahar

शराब-ए-अर्ग़वानी ख़ुम में रक्खी थी न मीने में

शराब-ए-अर्ग़वानी ख़ुम में रक्खी थी न मीने में ...

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