सभी हिंदी शायरी

हस्सास इदारे

पल-भर में बना देते हैं बातों का बतंगड़ ...

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हल्क़े हल्के

नाहक़ है ख़फ़ा मुझ से मिरे हल्क़े का वोटर ...

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गुज़ारिश

नज़्म जब आग़ाज़ की इक शा'इर-ए-मारूफ़ ने ...

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इलेक्शन

इलेक्शनों में ये दिन-रात जागने वाला ...

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दु'आ

मौला मिरी दु'आ को इतना तो वेट दे दे ...

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चैनल

मुस्कुरा कर मुझ से बेगम ने कहा

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ज़मीं पे सिर्फ़ उतारा नहीं 'मुनीर' उस ने

ज़मीं पे सिर्फ़ उतारा नहीं 'मुनीर' उस ने

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ये तो अहल-ए-जुनूँ का मस्कन है

ये तो अहल-ए-जुनूँ का मस्कन है

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ये किस तरह की ज़मीं पे हम ने बिना-ए-शहर-ए-मुराद रक्खी

ये किस तरह की ज़मीं पे हम ने बिना-ए-शहर-ए-मुराद रक्खी

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ये आईनों के हैं या नक़्स मेरे

ये आईनों के हैं या नक़्स मेरे

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उस वक़्त से बचा मुझे ऐ रब्ब-ए-काएनात

उस वक़्त से बचा मुझे ऐ रब्ब-ए-काएनात

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तुझ को ख़ुद से मिन्हा करते

तुझ को ख़ुद से मिन्हा करते

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तेरी सूरत में रिहाई मिल गई

तेरी सूरत में रिहाई मिल गई

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तय हो चुकी है उस से जुदाई मगर 'मुनीर'

तय हो चुकी है उस से जुदाई मगर 'मुनीर'

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सिपह-सालार के जब हाथ काँपें तो सिपाही भी

सिपह-सालार के जब हाथ काँपें तो सिपाही भी

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समझ में आता नहीं ये कैसी नुमू है मुझ में

समझ में आता नहीं ये कैसी नुमू है मुझ में

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पड़ जाते हैं कितने छाले हाथों में

पड़ जाते हैं कितने छाले हाथों में

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मुस्कुरा कर अगर वो देखे तो

मुस्कुरा कर अगर वो देखे तो

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मैं आज तुझ से मुलाक़ात करने आया हूँ

मैं आज तुझ से मुलाक़ात करने आया हूँ

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लड़ रहा हूँ मैं अकेला कार-ज़ार-ए-हस्त में

लड़ रहा हूँ मैं अकेला कार-ज़ार-ए-हस्त में

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