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ज़मीं पे सिर्फ़ उतारा नहीं 'मुनीर' उस ने
ज़मीं पे सिर्फ़ उतारा नहीं 'मुनीर' उस ने
ये किस तरह की ज़मीं पे हम ने बिना-ए-शहर-ए-मुराद रक्खी
ये किस तरह की ज़मीं पे हम ने बिना-ए-शहर-ए-मुराद रक्खी
ज़मीं पे सिर्फ़ उतारा नहीं 'मुनीर' उस ने
ये किस तरह की ज़मीं पे हम ने बिना-ए-शहर-ए-मुराद रक्खी