जिन की भी माँग रिहाई की है ...
होता मुमकिन तो फ़साने से मिटा देते तुझे ...
हमेशा ख़ुद को बहलाता रहा मैं इस कहानी से ...
अरे दुनिया सुनेगी शे'र कह दो ...
तिरी ताईद में दुनिया खड़ी है ...
सिर्फ़ तस्वीर मुस्कुराती है ...
क़िस्सा-ए-ज़ीस्त मुख़्तसर ही नहीं ...
क्या बताऊँ ऐ मेरे यार मुझे ...
दर्द-ए-दिल तेरी इंतिहा मुझ को ...
तिरे क़द तलक जो होते तिरा कान खींच लेते ...
किसी के ग़म में शिरकत चाहिए थी ...
किस से करूँ मैं 'इश्क़ ख़ुदारा कोई तो हो ...
जो मुख़्तसर है उसे बे-हिसाब कर देना ...
जिस को दुनिया मानती है आप का मेरा भी है ...
बड़ी ठंडी पवन है तुम कहाँ हो ...
बुत-परस्ती पे जो अपना दिल-ए-नाशाद आया ...
वो मुझ से इस क़दर सहमा हुआ है ...
थका-हारा हुआ हूँ मत कहो कुछ ...
तिरे बच्चों में ऐसी दिलकशी मा'लूम होती है ...
सोचता हूँ कोई किताब लिखूँ ...