तारीफ़
इतनी सुंदर इतनी सुघड़ इतनी ज़ियादा नेक ...
तफ़ावुत
वो जिन की पीरी-फ़क़ीरी का है जहाँ क़ाइल ...
सिम
शादी से पहले तो वेट कराती है
सेल्फ़ियाँ
अपलोड फेसबुक पे उन्हें उस ने कर दिया ...
रफ़्तार
सैंडिल के नीचे इक हील भी होती है ...
फुर्तियाँ
मगन रहते हैं जाने आप किन किन के ख़यालों में ...
निशानी
शहंशाहों ने चाहत की निशानी इस तरह छोड़ी ...
निसाब
यूँ निसाब-ए-'आशिक़ी में हो गया रद्द-ओ-बदल ...
नज़र
बनी हैं जब से अब्बा जी की आँखें
मुतालबा
कभी तो हम को भी लिफ़्ट दे कर किसी जगह पे ड्रॉप कर दो ...
मेहरबानी
मुझ मुहल्ले-दार पर है ख़ास ये उस की 'अता ...
मजबूरी
ये तरन्नुम ये अदाकारी ये बॉडी लैंग्वेज ...
लड़कियो
तज्वीज़ मिरे ज़ेहन में आई है ग़ज़ब की ...
कमज़ोरी
बेगम मुझ पर इतना ग़ुस्सा ठीक नहीं ...
जन्नत
रहेंगी अहल-ए-ईमाँ शौहरों के साथ जन्नत में ...
जनाब
क्या इन पे गर्द मिट्टी का होता नहीं असर ...