सभी हिंदी शायरी

हम करें बात दलीलों से तो रद होती है

हम करें बात दलीलों से तो रद होती है ...

muzaffar-warsi

ख़ोरेश्ट

हम दिल्ली में थे। मेरा बच्चा बीमार था। मैंने पड़ोस के डाक्टर कापड़िया को बुलाया, वो एक कुबड़ा आदमी था। बहुत पस्त क़द, लेकिन बेहद शरीफ़। उसने मेरे बच्चे का...

सआदत-हसन-मंटो

अन्न-दाता

(1) ...

कृष्ण-चंदर

जानकी

पूना में रेसों का मौसम शुरू होने वाला था कि पेशावर से अ’ज़ीज़ ने लिखा कि मैं अपनी एक जान पहचान की औरत जानकी को तुम्हारे पास भेज रहा हूँ, उसको या तो पूना...

सआदत-हसन-मंटो

बेगू

तसल्लियां और दिलासे बेकार हैं। लोहे और सोने के ये मुरक्कब में छटांकों फांक चुका हूँ। कौन सी दवा है जो मेरे हलक़ से नहीं उतारी गई। मैं आपके अख़लाक़ का मम...

सआदत-हसन-मंटो

बाँझ

मेरी और उसकी मुलाक़ात आज से ठीक दो बरस पहले अपोलोबंदर पर हुई। शाम का वक़्त था, सूरज की आख़िरी किरनें समुंदर की उन दराज़ लहरों के पीछे ग़ायब हो चुकी थी जो...

सआदत-हसन-मंटो

वक़्फ़ा

गुज़ाशतेम-ओ-गगुज़शीतेम-ओ-बूदनी हमा बूद ...

नैयर-मसूद

वो तो हश्र था मगर उस की अब वो शबाहतें भी चली गईं

वो तो हश्र था मगर उस की अब वो शबाहतें भी चली गईं ...

r-p-shokh

कम पुराना बहुत नया था फ़िराक़

कम पुराना बहुत नया था फ़िराक़ ...

habib-jalib

वीरान सराए का दिया है

वीरान सराए का दिया है ...

obaidullah-aleem

वतन की राह में वतन के नौजवाँ शहीद हो

वतन की राह में वतन के नौजवाँ शहीद हो ...

raja-mehdi-ali-khan

सुना है आलम-ए-बाला में कोई कीमिया-गर था

फिर शाम का अंधेरा छा गया। किसी दूर दराज़ की सरज़मीन से, न जाने कहाँ से मेरे कानों में एक दबी हुई सी, छुपी हुई आवाज़ आहिस्ता-आहिस्ता गा रही थी, ...

क़ुर्रतुलऐन-हैदर

वक़्फ़ा

गुज़ाशतेम-ओ-गगुज़शीतेम-ओ-बूदनी हमा बूद ...

नैयर-मसूद

अन्न-दाता

(1) ...

कृष्ण-चंदर

बेगू

तसल्लियां और दिलासे बेकार हैं। लोहे और सोने के ये मुरक्कब में छटांकों फांक चुका हूँ। कौन सी दवा है जो मेरे हलक़ से नहीं उतारी गई। मैं आपके अख़लाक़ का मम...

सआदत-हसन-मंटो

बाँझ

मेरी और उसकी मुलाक़ात आज से ठीक दो बरस पहले अपोलोबंदर पर हुई। शाम का वक़्त था, सूरज की आख़िरी किरनें समुंदर की उन दराज़ लहरों के पीछे ग़ायब हो चुकी थी जो...

सआदत-हसन-मंटो

वो कहाँ जलवा-ए-जाँ-बख़्श बुतान-ए-देहली

वो कहाँ जलवा-ए-जाँ-बख़्श बुतान-ए-देहली ...

meer-mehdi-majrooh

पाली हिल की एक रात

(एक तमसील जिसके सारे किरदार क़तई’ फ़र्ज़ी हैं) ...

क़ुर्रतुलऐन-हैदर

ये ग़ाज़ी ये तेरे पुर-अस्रार बन्दे

ट्रेन मग़रिबी जर्मनी की सरहद में दाख़िल हो चुकी थी। हद-ए-नज़र तक लाला के तख़्ते लहलहा रहे थे। देहात की शफ़्फ़ाफ़ सड़कों पर से कारें ज़न्नाटे से गुज़रती जाती थ...

क़ुर्रतुलऐन-हैदर

परवाज़ के बाद

जैसे कहीं ख़्वाब में जिंजर राजर्ज़ या डायना डरबिन की आवाज़ में ‘सान फ्रेंडोवैली’ का नग़्मा गाया जा रहा हो और फिर एकदम से आँख खुल जाए, या’नी वो कुछ ऐसा सा...

क़ुर्रतुलऐन-हैदर
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