सभी हिंदी शायरी

मोना लिसा

परियों की सर-ज़मीन को एक रास्ता जाता है शाह बलूत और सनोबर के जंगलों में से गुज़रता हुआ जहाँ रुपहली नद्दियों के किनारे चेरी और बादाम के सायों में ख़ूबसूर...

क़ुर्रतुलऐन-हैदर

مجو بھیا

پنڈت آنند سہائے تعلقدار ککراواں کے مرتے ہی شیخ سرور علی نے مختاری کے چونچلوں کو سلام کیا اور کمر کھول دی۔ رئیس پنڈت درگا سہائے نے جھوٹ موٹ کی بھی کی ل...

قاضی-عبد-الستار

उसका पति

लोग कहते थे कि नत्थू का सर इसलिए गंजा हुआ है कि वो हर वक़्त सोचता रहता है। इस बयान में काफ़ी सदाक़त है क्योंकि सोचते वक़्त नत्थू सर खुजलाया करता है। ...

सआदत-हसन-मंटो

गरज-बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला

गरज-बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला ...

nida-fazli

ये मुश्त-ए-ख़ाक अपने को जहाँ चाहे तहाँ ले जा

ये मुश्त-ए-ख़ाक अपने को जहाँ चाहे तहाँ ले जा ...

qasim-ali-khan-afridi

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ ...

ahmad-faraz

ज़माने भर से डर कर क्या करूँ मैं

ज़माने भर से डर कर क्या करूँ मैं ...

betakalluf-shaajapuri

चलते हुए जो देखे डंडे तिरी गली में

चलते हुए जो देखे डंडे तिरी गली में ...

betakalluf-shaajapuri

ज़ुल्म साले ने किया ये दिल-ए-दिल-गीर के साथ

ज़ुल्म साले ने किया ये दिल-ए-दिल-गीर के साथ ...

boom-merathi

अपना रफ़ीक़-ओ-आश्ना ग़ैर-ए-ख़ुदा कोई नहीं

अपना रफ़ीक़-ओ-आश्ना ग़ैर-ए-ख़ुदा कोई नहीं ...

mushafi-ghulam-hamdani

ख़बर-ए-तहय्युर-ए-इश्क़ सुन न जुनूँ रहा न परी रही

ख़बर-ए-तहय्युर-ए-इश्क़ सुन न जुनूँ रहा न परी रही ...

siraj-aurangabadi

ये ग़ाज़ी ये तेरे पुर-अस्रार बन्दे

ट्रेन मग़रिबी जर्मनी की सरहद में दाख़िल हो चुकी थी। हद-ए-नज़र तक लाला के तख़्ते लहलहा रहे थे। देहात की शफ़्फ़ाफ़ सड़कों पर से कारें ज़न्नाटे से गुज़रती जाती थ...

क़ुर्रतुलऐन-हैदर

नूर की किरन उस से ख़ुद निकलती रहती है

नूर की किरन उस से ख़ुद निकलती रहती है ...

ejaz-siddiqi

वही बुलंदी से नीचे हमें गिराते हैं

वही बुलंदी से नीचे हमें गिराते हैं ...

chand-kakralvi

तिरी जब मेहरबाँ यादें हुई हैं

तिरी जब मेहरबाँ यादें हुई हैं ...

chand-kakralvi

तपिश क्यों बढ़ रही है रास्तों की

तपिश क्यों बढ़ रही है रास्तों की ...

chand-kakralvi

शिद्दत बला की होती है जिस वक़्त प्यास में

शिद्दत बला की होती है जिस वक़्त प्यास में ...

chand-kakralvi

समझ रहे थे कि बादल हैं सर पे छाए हुए

समझ रहे थे कि बादल हैं सर पे छाए हुए ...

chand-kakralvi

सफ़र कैसा ये करना पड़ रहा है

सफ़र कैसा ये करना पड़ रहा है ...

chand-kakralvi

पहले तो अपने आप को तुझ सा करे कोई

पहले तो अपने आप को तुझ सा करे कोई ...

chand-kakralvi
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