सभी हिंदी शायरी

बे-रुख़ी है कि तग़ाफ़ुल है सज़ा है क्या है

बे-रुख़ी है कि तग़ाफ़ुल है सज़ा है क्या है ...

ahmar-nadeem

अपने हिस्से की चालें चलेगा ज़रूर

अपने हिस्से की चालें चलेगा ज़रूर ...

ahmar-nadeem

आलाम-ए-रोज़गार से मर'ऊब हो गए

आलाम-ए-रोज़गार से मर'ऊब हो गए ...

ahmar-nadeem

आख़िरी ज़र्ब दिल पर लगाते हुए

आख़िरी ज़र्ब दिल पर लगाते हुए ...

ahmar-nadeem

मिसाल-ए-बर्ग-ए-शिकस्ता हवा की ज़द पर है

मिसाल-ए-बर्ग-ए-शिकस्ता हवा की ज़द पर है ...

ahmad-azeem

ख़िलाफ़ था न ज़माना न वक़्त ऐसा था

ख़िलाफ़ था न ज़माना न वक़्त ऐसा था ...

ahmad-azeem

होंटों पे तबस्सुम का लबादा तो नहीं था

होंटों पे तबस्सुम का लबादा तो नहीं था ...

ahmad-azeem

दिल इस हुजूम-ए-शहर में तन्हा कहें जिसे

दिल इस हुजूम-ए-शहर में तन्हा कहें जिसे ...

ahmad-azeem

तुम्हें जो कह न पाया है ग़ज़ल में मैं सुनाता हूँ

तुम्हें जो कह न पाया है ग़ज़ल में मैं सुनाता हूँ ...

abhishek-jain

हमारा दिल दुखाया है किसी ने

हमारा दिल दुखाया है किसी ने ...

abhishek-jain

बिगड़ती बात हमें ही बनानी पड़ती है

बिगड़ती बात हमें ही बनानी पड़ती है ...

abhishek-jain

आ गए दिल में वसवसे कितने

आ गए दिल में वसवसे कितने

a-g-josh

मेरे दिल में उतर गया सूरज

मेरे दिल में उतर गया सूरज ...

javed-akhtar

ख़्वाब-ए-गुल-रंग के अंजाम पे रोना आया

ख़्वाब-ए-गुल-रंग के अंजाम पे रोना आया ...

shakeb-jalali

पाली हिल की एक रात

(एक तमसील जिसके सारे किरदार क़तई’ फ़र्ज़ी हैं) ...

क़ुर्रतुलऐन-हैदर

हतक

दिन भर की थकी मान्दी वो अभी अभी अपने बिस्तर पर लेटी थी और लेटते ही सो गई। म्युनिसिपल कमेटी का दारोग़ा सफ़ाई, जिसे वो सेठ जी के नाम से पुकारा करती थी, अ...

सआदत-हसन-मंटो

एक नग़्मा एक तारा एक ग़ुंचा एक जाम

एक नग़्मा एक तारा एक ग़ुंचा एक जाम ...

saghar-siddiqui

मैं ये किस के नाम लिक्खूँ जो अलम गुज़र रहे हैं

मैं ये किस के नाम लिक्खूँ जो अलम गुज़र रहे हैं ...

obaidullah-aleem

नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही

नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही ...

faiz-ahmad-faiz

लुत्फ़ फ़रमा सको तो आ जाओ

लुत्फ़ फ़रमा सको तो आ जाओ ...

saifuddin-saif
PreviousPage 105 of 642Next