सभी हिंदी शायरी

क्यों हो मुझ से ख़फ़ा कहो तो सही

क्यों हो मुझ से ख़फ़ा कहो तो सही ...

aalam-nizami

क्या बताऊँ किसी को है क्या दोस्ती

क्या बताऊँ किसी को है क्या दोस्ती ...

aalam-nizami

किसी के ज़ेहन में क्या है नज़र नहीं आता

किसी के ज़ेहन में क्या है नज़र नहीं आता ...

aalam-nizami

ख़ुद्दारियों की हद से निकलना पड़ा मुझे

ख़ुद्दारियों की हद से निकलना पड़ा मुझे ...

aalam-nizami

जिस तरह बच्चे बुज़ुर्गों के चरण चूमते हैं

जिस तरह बच्चे बुज़ुर्गों के चरण चूमते हैं ...

aalam-nizami

'इश्क़ में जानना ज़रूरी है

'इश्क़ में जानना ज़रूरी है ...

aalam-nizami

हसीन ख़्वाब दिखाया दिखा के छोड़ दिया

हसीन ख़्वाब दिखाया दिखा के छोड़ दिया ...

aalam-nizami

'उम्र भर जिस की आरज़ू की है

'उम्र भर जिस की आरज़ू की है

raheel-farooq

जोगिया

नहा-धो कर नीचे के तीन-साढ़े तीन कपड़े पहने जोगिया रोज़ की तरह उस दिन भी अलमारी के पास आ खड़ी हुई। और मैं अपने हाँ से थोड़ा पीछे हट कर देखने लगा। ऐसे म...

राजिंदर-सिंह-बेदी

पुतली की एवज़ हूँ बुत-ए-राना-ए-बनारस

पुतली की एवज़ हूँ बुत-ए-राना-ए-बनारस ...

hatim-ali-mehr

दिया सलाई

आब रंगीं हौज़ संगीन मारा पीचा गुल-ख़ंदा

unknown

इश्क़ और मौत

सुहानी नुमूद-ए-जहाँ की घड़ी थी ...

allama-iqbal

जब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाही

जब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाही ...

allama-iqbal

उसे भी पड़ गया इक दिन हमारे नाम से काम

उसे भी पड़ गया इक दिन हमारे नाम से काम ...

sayyad-ahmad

संग में रूह का इम्कान भी हो सकता है

संग में रूह का इम्कान भी हो सकता है ...

sayyad-ahmad

क़िस्मत तो देखो माह-ए-मुबीं तक पहुँच गए

क़िस्मत तो देखो माह-ए-मुबीं तक पहुँच गए ...

sayyad-ahmad

कभी तो जोश में आ और रंग-ओ-रस पे बरस

कभी तो जोश में आ और रंग-ओ-रस पे बरस ...

sayyad-ahmad

उठती कभी कभी है कोई टीस हाए दिल

उठती कभी कभी है कोई टीस हाए दिल ...

ishrat-sagheer

तू कहता है तुझे मतलब नहीं था

तू कहता है तुझे मतलब नहीं था ...

ishrat-sagheer

तू इस तरह से न कर लाल लाल आँखों को

तू इस तरह से न कर लाल लाल आँखों को ...

ishrat-sagheer
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