सभी हिंदी शायरी

ख़ैर गुज़री तिरी नज़र न हुई

ख़ैर गुज़री तिरी नज़र न हुई ...

bartar-madrasi

कटने को 'उम्र कट गई पूछो न क्या मिला

कटने को 'उम्र कट गई पूछो न क्या मिला ...

bartar-madrasi

जिसे न हिज्र ने मारा 'अज़ाब क्या जाने

जिसे न हिज्र ने मारा 'अज़ाब क्या जाने ...

bartar-madrasi

होती है हसीनों से जो जफ़ा 'उश्शाक़ गवारा करते हैं

होती है हसीनों से जो जफ़ा 'उश्शाक़ गवारा करते हैं ...

bartar-madrasi

दी गई है

हमें जो ज़िंदगानी दी गई है ...

ghaus-khah-makhah-hyderabadi

पहले थी सो अब भी है

हमेशा की तरह तंगी जो पहले थी वो अब भी है ...

ghaus-khah-makhah-hyderabadi

पेंशन-याफ़ता

न अब मैं प्यार कर सकता हूँ और न डाँट सकता हूँ ...

ghaus-khah-makhah-hyderabadi

तस्वीर

कुछ दिन से ये 'आलम है मेरा ...

baqar-naqvi

कहीं ज़ेहन सो न जाए

न चले ज़मीं तो कैसे ...

baqar-naqvi

न बिस्तर न बर्तन वग़ैरा वग़ैरा

न बिस्तर न बर्तन वग़ैरा वग़ैरा ...

betakalluf-shaajapuri

आख़िर क्यों

मेरे लॉन की घास ...

baqar-naqvi

ये भी क्या हिज्र के मारों की पज़ीराई है

ये भी क्या हिज्र के मारों की पज़ीराई है ...

baqar-naqvi

ये बाम नहीं थे ये दर ऐसे तो नहीं थे

ये बाम नहीं थे ये दर ऐसे तो नहीं थे ...

baqar-naqvi

उभरता चाँद लिक्खेंगे सुनहरा ख़्वाब लिक्खेंगे

उभरता चाँद लिक्खेंगे सुनहरा ख़्वाब लिक्खेंगे ...

baqar-naqvi

सब उधर भागें जिधर से तिरी ख़ुशबू आए

सब उधर भागें जिधर से तिरी ख़ुशबू आए ...

baqar-naqvi

फेंका हुआ गुल भी तिरा पत्थर का मज़ा दे

फेंका हुआ गुल भी तिरा पत्थर का मज़ा दे ...

baqar-naqvi

कुछ सामने हुआ है तो कुछ राज़ में हुआ

कुछ सामने हुआ है तो कुछ राज़ में हुआ ...

baqar-naqvi

खिड़कियों से भी अगर धूप न आई होती

खिड़कियों से भी अगर धूप न आई होती ...

baqar-naqvi

करो कुछ और क़यामत का इंतिज़ार अभी

करो कुछ और क़यामत का इंतिज़ार अभी ...

baqar-naqvi

कमाँ शिकस्ता है तरकश में भी ठिकाना नहीं

कमाँ शिकस्ता है तरकश में भी ठिकाना नहीं ...

baqar-naqvi
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