सभी हिंदी शायरी

चराग़ हँस लें ये मौक़ा' ज़रा नहीं देती

चराग़ हँस लें ये मौक़ा' ज़रा नहीं देती ...

wasim-nadir

बीती रुतों का एल्बम ले कर बैठ गए

बीती रुतों का एल्बम ले कर बैठ गए ...

wasim-nadir

भीक दीदार की दे दो मुझे दाता बन कर

भीक दीदार की दे दो मुझे दाता बन कर ...

wasim-nadir

अगर कुछ फ़िक्र के लम्हे मयस्सर हो गए होते

अगर कुछ फ़िक्र के लम्हे मयस्सर हो गए होते ...

wasim-nadir

अफ़सोस है कि इतनी सफ़ाई के बा'द भी

अफ़सोस है कि इतनी सफ़ाई के बा'द भी ...

wasim-nadir

अभी यक़ीन के मंसब पे मत बिठाओ मुझे

अभी यक़ीन के मंसब पे मत बिठाओ मुझे ...

wasim-nadir

आरज़ूओं के समुंदर से निकल कर आए

आरज़ूओं के समुंदर से निकल कर आए ...

wasim-nadir

आँसू हमारा उस की हथेली पे आ गया

आँसू हमारा उस की हथेली पे आ गया ...

wasim-nadir

दीवार-ओ-दर के साथ कोई इंतिज़ाम है

दीवार-ओ-दर के साथ कोई इंतिज़ाम है ...

vipul-kumar

उसे कैसे करें स्वीकार मोहन

उसे कैसे करें स्वीकार मोहन ...

vikas-sahaj

उदासियों को गले लगाए उदास लड़के

उदासियों को गले लगाए उदास लड़के ...

vikas-sahaj

ख़ुद से ख़ुद की अन-बन हूँ मैं

ख़ुद से ख़ुद की अन-बन हूँ मैं ...

vikas-sahaj

जो सच नहीं है वही दिखाना तरस न खाना

जो सच नहीं है वही दिखाना तरस न खाना ...

vikas-sahaj

नया नया है सो कह लो इसे अकेला-पन

नया नया है सो कह लो इसे अकेला-पन

vijay-sharma

ज़र्द चेहरे पे ख़ुश-लिबास आँखें

ज़र्द चेहरे पे ख़ुश-लिबास आँखें ...

vibha-jain-'khwaab'

ज़हर से ज़हर कटे काँटे से किरची निकले

ज़हर से ज़हर कटे काँटे से किरची निकले ...

vibha-jain-'khwaab'

कभी हल्का कभी गहरा हमारी आँख का काजल

कभी हल्का कभी गहरा हमारी आँख का काजल ...

vibha-jain-'khwaab'

अब दर्द-ए-दिल से कह दो कि छुप कर वहीं रहे

अब दर्द-ए-दिल से कह दो कि छुप कर वहीं रहे ...

vibha-jain-'khwaab'

ये फ़ितरत है छुपी रहती है पहचानी नहीं जाती

ये फ़ितरत है छुपी रहती है पहचानी नहीं जाती ...

ustad-vajahat-husain-khan

पाँव काँटों पे तो फूलों पे नज़र रखते हैं

पाँव काँटों पे तो फूलों पे नज़र रखते हैं ...

ustad-vajahat-husain-khan
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