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ज़हर से ज़हर कटे काँटे से किरची निकले
ज़हर से ज़हर कटे काँटे से किरची निकले ...
कभी हल्का कभी गहरा हमारी आँख का काजल
कभी हल्का कभी गहरा हमारी आँख का काजल ...
अब दर्द-ए-दिल से कह दो कि छुप कर वहीं रहे
अब दर्द-ए-दिल से कह दो कि छुप कर वहीं रहे ...
ये फ़ितरत है छुपी रहती है पहचानी नहीं जाती
ये फ़ितरत है छुपी रहती है पहचानी नहीं जाती ...
पाँव काँटों पे तो फूलों पे नज़र रखते हैं
पाँव काँटों पे तो फूलों पे नज़र रखते हैं ...