सभी हिंदी शायरी

सामने तेज़ हवाओं के जो उड़ जाएगा

सामने तेज़ हवाओं के जो उड़ जाएगा ...

aalam-nizami

नूर पैहम सफ़र में रहता है

नूर पैहम सफ़र में रहता है ...

aalam-nizami

मेरी पलकों की दहलीज़ पर इस तरह मेरे अश्कों न तुम जगमगाते रहो

मेरी पलकों की दहलीज़ पर इस तरह मेरे अश्कों न तुम जगमगाते रहो ...

aalam-nizami

मौसम-ए-वक़्त बदलना है बदल जाएगा

मौसम-ए-वक़्त बदलना है बदल जाएगा ...

aalam-nizami

किसी मक़ाम से गुज़रे नहीं फिसलता है

किसी मक़ाम से गुज़रे नहीं फिसलता है ...

aalam-nizami

ख़ाना-ए-दिल को सजाओगे तो याद आउँगा

ख़ाना-ए-दिल को सजाओगे तो याद आउँगा ...

aalam-nizami

कैसे कह दूँ कहीं ए'लान नहीं करता है

कैसे कह दूँ कहीं ए'लान नहीं करता है ...

aalam-nizami

कभी शफ़क़ तो कभी गुल कभी जिनाँ महके

कभी शफ़क़ तो कभी गुल कभी जिनाँ महके ...

aalam-nizami

जिस की ख़ातिर सारा ज़माना छोड़ दिया

जिस की ख़ातिर सारा ज़माना छोड़ दिया ...

aalam-nizami

जिन्हें 'उरूज हमारा गिराँ गुज़रता है

जिन्हें 'उरूज हमारा गिराँ गुज़रता है ...

aalam-nizami

इस लिए तो बुझा नहीं हूँ मैं

इस लिए तो बुझा नहीं हूँ मैं ...

aalam-nizami

हैं उलझनें तमाम मिरी ज़िंदगी के साथ

हैं उलझनें तमाम मिरी ज़िंदगी के साथ ...

aalam-nizami

ग़ैर-मुमकिन है कि वो मुझ से ख़फ़ा हो जाएगा

ग़ैर-मुमकिन है कि वो मुझ से ख़फ़ा हो जाएगा ...

aalam-nizami

धूप में क़तरा-ए-शबनम को तरस जाओगे

धूप में क़तरा-ए-शबनम को तरस जाओगे ...

aalam-nizami

दानिस्ता कभी ऐसी हिमाक़त नहीं करता

दानिस्ता कभी ऐसी हिमाक़त नहीं करता ...

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दफ़'अतन घटा की आड़ से चाँदनी कशीद हो गई

दफ़'अतन घटा की आड़ से चाँदनी कशीद हो गई ...

aalam-nizami

अपनी ख़ुदी को तुम सर-ए-बाज़ार बेच कर

अपनी ख़ुदी को तुम सर-ए-बाज़ार बेच कर ...

aalam-nizami

ऐसा लगता है वो नादान समझते हैं मुझे

ऐसा लगता है वो नादान समझते हैं मुझे ...

aalam-nizami

ऐ अंधेरे रौशनी की ज़द में आना छोड़ दे

ऐ अंधेरे रौशनी की ज़द में आना छोड़ दे ...

aalam-nizami

आँगन के दरख़्तों के लिए कुछ भी नहीं है

आँगन के दरख़्तों के लिए कुछ भी नहीं है ...

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