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सर सुबुक-बारी से कोई दर पे ख़म होने को है
सर सुबुक-बारी से कोई दर पे ख़म होने को है ...
उन आँखों में 'अक्स कभी तू अपना देख न पाएगा
उन आँखों में 'अक्स कभी तू अपना देख न पाएगा ...
सर सुबुक-बारी से कोई दर पे ख़म होने को है ...
उन आँखों में 'अक्स कभी तू अपना देख न पाएगा ...