सभी हिंदी शायरी

ज़ालिम को भी फिर नश्शा-ए-बेदाद-गरी है

ज़ालिम को भी फिर नश्शा-ए-बेदाद-गरी है ...

abdullah-saqib

सितम-रसीदा हूँ मुझ पर वो इर्तिकाज़ करे

सितम-रसीदा हूँ मुझ पर वो इर्तिकाज़ करे ...

abdullah-saqib

सर सुबुक-बारी से कोई दर पे ख़म होने को है

सर सुबुक-बारी से कोई दर पे ख़म होने को है ...

abdullah-saqib

रौशनी ख़त्म करो काम हुआ चाहता है

रौशनी ख़त्म करो काम हुआ चाहता है ...

abdullah-saqib

मा'सियत राह की दीवार हुई जाती है

मा'सियत राह की दीवार हुई जाती है ...

abdullah-saqib

खिल उठे चेहरा-ए-गुमनाम जब उस ने देखा

खिल उठे चेहरा-ए-गुमनाम जब उस ने देखा ...

abdullah-saqib

दिल को तिरे ख़याल में हल कर दिया गया

दिल को तिरे ख़याल में हल कर दिया गया ...

abdullah-saqib

جب قطع کی مسافتِ شب آفتاب نے

جب قطع کی مسافتِ شب آفتاب نے ...

میر-انیس

किस शेर की आमद है कि रन काँप रहा है

किस शेर की आमद है कि रन काँप रहा है ...

मिर्ज़ा-सलामत-अली-दबीर

कुछ न कुछ आया तो होगा उस के जी में

कुछ न कुछ आया तो होगा उस के जी में ...

yashvardhan-mishra

हर कोई करने लगा है हाथ धो कर ख़ुद-कुशी

हर कोई करने लगा है हाथ धो कर ख़ुद-कुशी ...

yashvardhan-mishra

ये तो अब तय है कि वो लौट के आने से रहा

ये तो अब तय है कि वो लौट के आने से रहा ...

wasim-nadir

ये मत समझना कोई बद-नुमा सा दाग़ हैं हम

ये मत समझना कोई बद-नुमा सा दाग़ हैं हम ...

wasim-nadir

ये क्या कि फूल बनो एक ही के साथ रहो

ये क्या कि फूल बनो एक ही के साथ रहो ...

wasim-nadir

वो क्या बुनेगा कोई ख़्वाब सल्तनत के लिए

वो क्या बुनेगा कोई ख़्वाब सल्तनत के लिए ...

wasim-nadir

वो जो कासा लिए हर दर पे खड़ा होता है

वो जो कासा लिए हर दर पे खड़ा होता है ...

wasim-nadir

वो अपनी जान पर ऐसा ग़ज़ब करेगा क्यों

वो अपनी जान पर ऐसा ग़ज़ब करेगा क्यों ...

wasim-nadir

उन आँखों में 'अक्स कभी तू अपना देख न पाएगा

उन आँखों में 'अक्स कभी तू अपना देख न पाएगा ...

wasim-nadir

उदासियों के सिवा इस मकान में क्या है

उदासियों के सिवा इस मकान में क्या है ...

wasim-nadir

उदासियों का मुसलसल नुज़ूल अब भी है

उदासियों का मुसलसल नुज़ूल अब भी है ...

wasim-nadir
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