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इन अपने हाथों से साग़र मुझे पिला तो सही
इन अपने हाथों से साग़र मुझे पिला तो सही ...
न ख़ल्वत रास आती है न हम महफ़िल में रहते हैं
न ख़ल्वत रास आती है न हम महफ़िल में रहते हैं ...
'अम्बर' उस के बीते कल का क़िस्सा हूँ मैं
'अम्बर' उस के बीते कल का क़िस्सा हूँ मैं
हम ने भी ज़ुल्मतों को मिटाया है अपने तौर
हम ने भी ज़ुल्मतों को मिटाया है अपने तौर
मिरे ख़याल की नुदरत किसी को क्या मा'लूम
मिरे ख़याल की नुदरत किसी को क्या मा'लूम ...