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हम ने यूँ ख़ुद से तिरा ज़िक्र किया शाम के बा'द
हम ने यूँ ख़ुद से तिरा ज़िक्र किया शाम के बा'द ...
दुख कितने हैं ग़म कितने हैं आलाम कितने हैं
दुख कितने हैं ग़म कितने हैं आलाम कितने हैं ...
हम ने यूँ ख़ुद से तिरा ज़िक्र किया शाम के बा'द ...
दुख कितने हैं ग़म कितने हैं आलाम कितने हैं ...