किस की आहट पे डर गया होगा ...
इतना आसाँ है छोड़ना उस को ...
हमारे ध्यान में हर लम्हा मुस्कुराता है ...
दोनों जहाँ में मुझ को झुकाया नहीं गया ...
दिल मिरा उस शख़्स की जागीर है ...
अपनी शोहरत का भरम मुझ पे जताने वाला ...
अगर मैं वक़्त से पहले बड़ा नहीं होता ...
आसमानों से जा मिला हूँ मैं ...
तेरा छूना तिरा न कर दे मुझे ...
पहले तो देखा आँख-भर उस ने ...
मुझे छोड़ कर ख़ुश हो तो ख़ुश रहो ...
मौजों की जंग है सफ़ीने से ...
ख़्वाब थे आरज़ू थे जाँ थे हम ...
खिड़की से झाँकता हुआ चेहरा ...
कौन समझता है रस्तों का ख़ाली-पन ...
कैसे नसीब का कोई चक्कर बदल गया ...
कहीं उड़ा न ले जाएँ ये आँधियाँ मुझ को ...
जुदाई तुम से गवारा नहीं करेंगे हम ...
'इश्क़ को छोड़ कर और सब बात की ...
है दर्द कितना ये बस हम-ख़याल पूछेगा ...