सभी हिंदी शायरी

इक झलक में ले गई सब लूट कर अच्छा लगा

इक झलक में ले गई सब लूट कर अच्छा लगा ...

shariq-ali-shariq

बस एक उन के ही आने का इंतिज़ार हुआ

बस एक उन के ही आने का इंतिज़ार हुआ ...

shariq-ali-shariq

हर हर शजर उमीद था हर हर शजर था यास

हर हर शजर उमीद था हर हर शजर था यास ...

shamsur-rahman-faruqi

दिल में जलते हैं हसरतों के अलाव

दिल में जलते हैं हसरतों के अलाव ...

shameem-shama-sidiqi

ज़हे-नसीब कि दुनिया ने तेरे ग़म ने मुझे

ज़हे-नसीब कि दुनिया ने तेरे ग़म ने मुझे

shakeel-badayuni

सूरत का चौ़टा बाज़ार

यहाँ हर शाम ...

shakeel-azmi

मैं सीता हूँ

पती के साथ में ...

shakeel-azmi

साहिल तमाम अश्क-ए-नदामत से अट गया

साहिल तमाम अश्क-ए-नदामत से अट गया

shakeb-jalali

ये दवा उस ने लिखी है मिरी बेज़ारी की

ये दवा उस ने लिखी है मिरी बेज़ारी की ...

shahbaz-talib

इस भरोसे पे कि शायद कोई आए घर में

इस भरोसे पे कि शायद कोई आए घर में ...

shahbaz-talib

हर मुन्हरिफ़ निगाह को क़ाइल किया गया

हर मुन्हरिफ़ निगाह को क़ाइल किया गया ...

shahbaz-talib

बदल के रुख़ कोई मंज़र रफ़ू किया जाए

बदल के रुख़ कोई मंज़र रफ़ू किया जाए ...

shahbaz-talib

अब यहीं से ज़वाल है उस का

अब यहीं से ज़वाल है उस का ...

shahbaz-talib

ऊँचाइयों से ख़ाक में उतरे हुए भी देख

ऊँचाइयों से ख़ाक में उतरे हुए भी देख ...

shahbaz-choudhary

तुम को ख़ुद अपनी ज़ात का मतलब नहीं पता

तुम को ख़ुद अपनी ज़ात का मतलब नहीं पता ...

shahbaz-choudhary

तेरे बग़ैर कोई गवारा नहीं किया

तेरे बग़ैर कोई गवारा नहीं किया ...

shahbaz-choudhary

शहर-ओ-बाज़ार से निकल आए

शहर-ओ-बाज़ार से निकल आए ...

shahbaz-choudhary

पिंजरे से क़फ़स से तो कभी जाल से उभरे

पिंजरे से क़फ़स से तो कभी जाल से उभरे ...

shahbaz-choudhary

क्या क्या तिरे फ़िराक़ में यूँ कर नहीं गया

क्या क्या तिरे फ़िराक़ में यूँ कर नहीं गया ...

shahbaz-choudhary

दूर निकला है उफ़ुक़ पर कहीं तारा कोई

दूर निकला है उफ़ुक़ पर कहीं तारा कोई ...

shahbaz-choudhary
PreviousPage 121 of 642Next