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ज़िंदगी इक सराब-आश्ना माजरा तुम कहाँ जाओगे हम कहाँ जाएँगे
ज़िंदगी इक सराब-आश्ना माजरा तुम कहाँ जाओगे हम कहाँ जाएँगे ...
क़र्या-ए-जाँ से हो कर गुज़रता था जो रास्ता या-अख़ी
क़र्या-ए-जाँ से हो कर गुज़रता था जो रास्ता या-अख़ी ...
नर्ग़ा-ए-ज़ुल्मत-ए-शब से मैं सहर बन के उठा
नर्ग़ा-ए-ज़ुल्मत-ए-शब से मैं सहर बन के उठा ...
लोग वाक़िफ़ न रहे लज़्ज़त-ए-रुस्वाई से
लोग वाक़िफ़ न रहे लज़्ज़त-ए-रुस्वाई से ...
किस क़दर मंज़िल-ए-आसान में रखा गया हूँ
किस क़दर मंज़िल-ए-आसान में रखा गया हूँ ...
करता था अपने हुस्न पे क्या क्या क़यास चाँद
करता था अपने हुस्न पे क्या क्या क़यास चाँद ...
इस क़दर मुश्ताक़ परवाना हुआ था सुब्ह का
इस क़दर मुश्ताक़ परवाना हुआ था सुब्ह का ...