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लबों पे अपने हँसी सजा कर मैं जी रहा हूँ तुम्हारी ख़ातिर
लबों पे अपने हँसी सजा कर मैं जी रहा हूँ तुम्हारी ख़ातिर ...
इस से ज़ियादा क्या कहूँ मैं अब सिफ़ात में
इस से ज़ियादा क्या कहूँ मैं अब सिफ़ात में ...
हाँ बिखरने दे तसल्ली से दिल-ए-बिस्मिल मुझे
हाँ बिखरने दे तसल्ली से दिल-ए-बिस्मिल मुझे ...
‘उबूर कर वादी-ए-तज़ब्ज़ुब फ़राज़ की रहगुज़र से पहले
‘उबूर कर वादी-ए-तज़ब्ज़ुब फ़राज़ की रहगुज़र से पहले ...
तशफ़्फ़ी-बख़्श है ख़ुद बे-क़रारी बे-क़रारों की
तशफ़्फ़ी-बख़्श है ख़ुद बे-क़रारी बे-क़रारों की ...
पता नहीं हमें देने हैं इम्तिहाँ क्या क्या
पता नहीं हमें देने हैं इम्तिहाँ क्या क्या ...