सभी हिंदी शायरी
जो हक़ पे चलता है सच का निशान खींचता है
जो हक़ पे चलता है सच का निशान खींचता है ...
उसी रस्ते से गुज़रें और परखें हम निशाँ अपना
उसी रस्ते से गुज़रें और परखें हम निशाँ अपना ...
बे-रुख़ी हद से बढ़ी और सिर्फ़ इतना ही नहीं
बे-रुख़ी हद से बढ़ी और सिर्फ़ इतना ही नहीं ...
लगा के आई थी सौतन ख़िज़ाब 'ईद के दिन
लगा के आई थी सौतन ख़िज़ाब 'ईद के दिन ...
जब मिरे जज़्बात को छू कर गुज़र जाती है रात
जब मिरे जज़्बात को छू कर गुज़र जाती है रात ...
बज़्म-ए-‘अज़ा बनी हुई है बज़्म-ए-ज़ौक़-ओ-शौक़
बज़्म-ए-‘अज़ा बनी हुई है बज़्म-ए-ज़ौक़-ओ-शौक़ ...
ज़िक्र क्यूँ-कर न करूँ आप के रुख़्सारों का
ज़िक्र क्यूँ-कर न करूँ आप के रुख़्सारों का ...